स्टडी मटेरियल

नवीन राज्यों का उदय

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।
Get it on Google Play

मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद अनेक छोटे छोटे राज्यों का उदय हुआ। इन राज्यों की सूची इस प्रकार है :-

सिख (1799)

गुरुनानक सिख के प्रथम गुरु थे। इनका जन्म ननकाना साहिब तलवंडी (जो अब पाकिस्तान में है) हुआ था। गुरुनानक देव जी कर्म के सिद्धान्तों में विश्वास  करते थे। इन्होने अपना उत्तराधिकारी गुरु अंगद को बनाया। गुरुनानक इब्राहिम लोदी के समकालीन थे।

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।

read more

भरतपुर (1722)

  मुगल सल्तनत के कमजोर हो जाने के बाद भरतपुर की नींव 17 वी सदी में चूड़ामन जाट ने किया था । बाद में इसे राजा सुरजमल ने सजाया। 1733 ईस्वी में भरतपुर नगर की नीव पड़ी।  

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।

read more

हैदराबाद  (1591)

 हैदराबाद राज्य का संस्थापक निजाम उल मुल्क था जिसे चिन्किलिच खा के नाम से भी जाना जाता है। सैयद बंधुओ में से एक हुसैन अली  खा की हत्या इसी ने करवाई थी। 1722  ईस्वी में मुग़ल बादशाह ने इन्हे अपने वजीर पद पर नियुक्त किया। लेकिन दिल्ली दरबार में अपने खिलाफ लोगो का रवैया देखकर वह दक्कन चला गया और 1724  में हैदराबाद की नीव डाली।

read more

मैसूर (1399)

वाडियार वंश की स्थापना तालीकोटा के युद्ध के बाद हुई। जो विजयनगर का हिस्सा था। 18वी  सदी में मैसूर पर चिक्का  कृष्ण राज  शासन  था। परन्तु शासन की बागडोर नंगराज  एवं देवराज  जैसे मंत्रियो के हाथो में थी। उस समय  हैदर  अली मैसूर में एक सिपाही के रूप में तैनात था। परन्तु हैदर अली की लक्ष्य बहुत बड़ा था। 1761  में राजा पर आक्रमण करके वो स्वयं को राजा घोषित कर दिया।

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।

read more

अवध  (1722)

अवध का संथापक सआदत खा  था। मुगल  बादशाह  मोहम्मद शाह ने उसे अवध का सूबेदार  नियुक्त  किया था। लेकिन वह  अपने आप को आजाद रखा तथा नादिरशाह  1739  के आक्रमण के समय मुगल बादशह  ने सआदत  खा को दिल्ली बुलाया। वह बहादुरी से लड़ा पर बंदी बना लिया गया। नादिरशाह ने सआदत खा से 20  करोड़ की मांग किया लेकिन वो दे न सका  फिर उसने विष खाकर खुद की हत्या कर ली।

read more

बंगाल  (1717)

मुर्शीद कुली खा को बंगाल का संथापक माना जाता है। मुर्शीद कुली बंगाल का नबाब (1713 से 1727 तक) रहा। मुर्शीद कुली खा के बाद बंगाल का नबाब उसका दामाद शुजाउद्दीन बना । 

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।

भारत के प्रागैतिहासिक काल के इतिहास में भी बंगाल का विशिष्‍ट स्‍थान है। सिकंदर के आक्रमण के समय बंगाल में गंगारिदयी नाम का साम्राज्‍य था। गुप्‍त तथा मौर्य सम्राटों का बंगाल पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। बाद में शशांक बंगाल नरेश बना।

read more

मराठा (1674 )

मराठा साम्राज्य का उदभव शिवाजी के समय हुआ था । शिवाजी का जन्म शिवनेर में हुआ था । इनमे माता का नाम जीजाबाई एवम पिता का नाम शाहजी भोंसले था। शिवाजी ने अपनी राजधानी रायगढ़ को बनाया। शिवाजी ने 1674 ईस्वी में अपनी राजधानी रायगढ़ में अपना राज्याभिषेक वाराणसी के ब्राह्मण गंगाभट के द्वारा कराया ।

read more

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।

नवीन राज्यों का उदय का कारण

  1. 18वीं सदी में मुगल साम्राज्य की शिथिलता से राजनैतिक शून्य स्थिति
  2. मुगल सूबेदारों एवं प्रादेशिक सरदारों की अर्द्ध स्वतंत्र अथवा स्वतंत्र राज्य बनाने की महत्वकांक्षा – बंगाल, अवध, हैदराबाद, मैसूर आदि।
  3. मुगल शासन के खिलाफ स्थानीय सरदारों, जमींदारों तथा किसानों का विद्रोह एवं स्वतंत्र राज्यों की स्थापना – मराठा, अफगान, पंजाब एवं जाट आदि।
  4. सुदूरवर्ती क्षेत्रों में मुगल प्रभाव का अभाव।

हैदराबाद

सकूरखेडा युद्धा (अक्टूबर, 1724)

  1. पृष्ठभूमि: मुगल सम्राट मुहम्मद शाह ने मुबारिज खां को दक्कन का वायसराय बनाया और आदेश दिया कि वह चिनकिलिच खां (निजामुल मुल्क) को जीवित अथवा मृत सम्राट के सम्मुख उपस्थित करे।
  2. युद्ध: सकूरखेडा का युद्ध मुबारिज खां एवं निजामुल मुल्क के बीच लड़ा गया जिसमें मुबारिज खां मारा गया एवं निजाम दक्कन का स्वामी बन गया।
  3. परिणाम: सम्राट ने विवश होकर निजामुल मुल्क को दक्कन का वायसराय नियुक्त कर दिया एवं आसफजाह की उपाधि प्रदान की।
  4. इस प्रकार निजामुल मुल्क आसफजाह ने 1724 ई. में हैदराबाद राज्य की स्थापना की।

अवध

बनारस की संधि (1773 ई.)

यह संधि अवध के नवाब शुजाउद्दौला एवं वारेन हेस्टिंग्स के बीच हुई।इस संधि के द्वारा इलाहबाद एवं कडा जिले अंग्रेजों द्वारा अवध के नवाब को 50 लाख रूपये में बेचे गये।

फैजाबाद की संधि (1775 ई.)

जाट

लेाहगढ़ किला, भरतपुर

अष्टधातु के दरवाजे का इतिहास

पंजाब

सिख धर्म के 10 गुरुओं के नाम

  1. गुरु नानक देव जी (1469-1539)
  2. गुरु अंगद देव जी (1539-1552)
  3. गुरु अमर दास जी (1552-1574)
  4. गुरु राम दास जी (1574-1581)
  5. गुरु अर्जुन देव जी (1581-1606)
  6. गुरु हरगोविंद जी (1606-1644)
  7. गुरु हर राय जी (1644-1661 )
  8. गुरु हरकिशन जी (1661-1664)
  9. गुरु तेग बहादुर जी (1664-1675)
  10. गुरु गोविंद सिंह जी (1675-1708)

महाराजा रणजीत सिंह

अमृतसर की संधि (1809 ई.)

रणजीत सिंह का प्रशासन

प्रथम आंग्ल-सख युद्ध (1845-46)

द्वितीय आंग्ल सिख युद्ध (1848-49)

  1. इस समय पंजाब का शासक दिलीप सिंह था एवं भारत का गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी था।
  2. सिख सेना का नेतृत्व शेर सिंह ने किया।
  3. रामनगर की लडाई: अंग्रेजों का नेतृत्व जनरल गाॅफ ने किया। यह युद्ध अनिर्णायक रहा।
  4. चिलियांवाला की लड़ाई: अंग्रेजों का नेतृत्व जनरल गाॅफ ने किया। यह युद्ध अनिर्णायक रहा।
  5. गुजरात की लड़ाई: यह युद्ध ‘तोपों के युद्ध’ के नाम से जाना जाता है। इसमें अंग्रेजी सेना का नेतृत्व सर चाल्र्स नेपियर ने किया।
  6. यह युद्ध पूर्णतः निर्णायक था। इस युद्ध से पंजाब राज्य की शक्ति समाप्त हो गयी एवं पंजाब पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया।

मैसूर

18वीं सदी में मैसूर में चिक्का कृष्ण राज का शासन था परन्तु यह कठपुतली मात्र राजा था। वास्तविक शक्ति इसके दो मंत्रियों नंजराज एवं देवराज के हाथ में थी।

हैदरअली

1721 में मैसूर के कोलार में जन्मा हैदरअली मैसूर की सेना में एक साधारण अधिकारी था बाद में हैदर अली को डिंडीगुल का फौजदार नियुक्त किया गया।

हैदरअली ने डिंडीगुल में फ्रांसीसियों के सहयोग से शस्त्रगार की स्थापना की। (1755 ई. में)

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।

1761 तक हैदरअली के पास मैसूर की समस्त शक्ति केन्द्रित हो गयी।

प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767-69 ई.)

द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780-84 ई.)

टीपू सुल्तान (1782-1799 ई.)

तृतीय आंग्ला-मैसूर युद्ध (1790-92)

चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध (1799 ई.)

सर मोक्षगुण्डम विश्वेसरैया (एम. विश्वेसरैया) को आधुनिक मैसूर का पिता कहा जाता है।

बंगाल

सिराज-उद्-दौला (1756-57 ई.)

ब्लैक होल घटना (20 जून, 1756)

हालवेल के अनुसार, सिराज ने 20 जून की रात 146 अंग्रेज बंदियों को 18 फुट लंबी एवं 14 फुट 10 ईच चौड़ी कोठरी में बन्द कर दिया था। अगले दिन जब देखा तो हालवेल सहित 23 व्यक्ति ही जिन्दा ही बचे थे। अंग्रेज इतिहासरों ने इस घटना को ब्लैक हाॅल त्रासदी कहा है।

प्लासी का युद्ध (23 जून, 1757 ई.)

मीर जाफर (1757-60 ई.)

मीर कासिम (1760-63 ई.)

बक्सर का युद्ध (1764 ई.)

बंगाल में द्वैध शासन

कॉम्पिटिशन एक्साम्स की बेहतर तयारी के लिए अभी करियर टुटोरिअल ऍप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।