2 मार्च, 2020 को भारत सरकार ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया। इस अभ्यारण्य में गंगा डॉल्फ़िन और गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल पाए जाते हैं।
यह अभ्यारण्य प्राकृतिक रूप से रहने वाले घड़ियालों का आवास है। 75% घड़ियाल इस अभ्यारण्य में रहते हैं। इस अभ्यारण्य में प्रवासी पक्षियों की 180 प्रजातियाँ और ताजे पानी की गंगा डॉल्फिन भी पायी जाती हैं। इको सेंसिटिव ज़ोन घोषित होने के कारण रिसॉर्ट्स, होटल या अन्य आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों के निर्माण पर रोक होती है।
यह अभ्यारण्य विंध्य श्रेणी से शुरू होता है, चंबल नदी के साथ-साथ यह यमुना नदी में समाप्त होता है। यह राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है।
इको-सेंसिटिव जोन एक संरक्षित क्षेत्र हैं जो “शॉक एब्जॉर्बर” के रूप में कार्य करते हैं। वे ट्रांजीशन ज़ोन के रूप में भी कार्य करते हैं। इन पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का नियंत्रण होता है। ज़ोन को विनियमित करने के लिए कोई अधिनियम नहीं हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों को मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार विनियमित किया जाता है।
फ्रांस में 14 जुलाई को फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है…
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के शोधकर्ताओं द्वारा ‘PIVOT’ नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड उपकरण…
प्राकृतिक खेती सम्मेलन 10 जुलाई, 2022 को आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल…
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 6 जुलाई, 2022 को निर्माण श्रमिकों को उनकी क्षमताओं…
विश्व शांति मंच 2022 के दसवें संस्करण का आयोजन बीजिंग में सिंघुआ विश्वविद्यालय द्वारा किया…
संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिवर्ष विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन…