UNIT-7 कोहलर का सूझ अथवा अंतर्दृष्टि सिद्धांत

अधिगम सिद्धांतों में  ‘क्षेत्र सिद्धांत’ के अंतर्गत कोहलर का सूझ सिद्धांत अथवा अंतर्दृष्टि सिद्धांत  का वर्णन किया गया है।

अंतर्दृष्टि सिद्धांत की व्याख्या कोहलर ने अपनी पुस्तक ‘गेस्टाल्ट साइकोलॉजी’ (1959) में की है।
गेस्टाल्ट एक जर्मन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ ‘समग्रता अथवा पूर्णता’ है।  इसके प्रतिपादकों में मेक्स वरदाइमर में कूर्ट कोफ्का और वोल्फगेंग कोहलर उल्लेखनीय है.


इसे सीखने का ‘गेस्टाल्ट सिद्धांत’ भी कहा जाता है। गेस्टाल्ट सिद्धांत में आकार की पूर्णता को महत्व दिया जाता है उसके विभिन्न अंगों पर ध्यान नहीं दिया जाता है क्योंकि अंगों की अपेक्षा संपूर्ण हमेशा बड़ा होता है।

एंडरसन के अनुसार “अंतर्दृष्टि से तात्पर्य समस्या के हल को यकायक प्राप्त कर लेने से है” अर्थात अधिगमकर्ता प्रत्यक्षीकरण और विचारों को संगठित करके किसी समस्या का उपयुक्त समाधान प्रस्तुत करता है।

कोहलर का प्रयोग-

कॉहलर ने अपने प्रयोग में सुल्तान नामक चिंपांजी पर अध्ययन किया।

कोहलर ने एक पिंजरे में सुल्तान नामक चिंपांजी को बंद कर दिया। पिंजरे में दो छड़े इस प्रकार रखी गई कि उन्हें एक दूसरे में फंसाकर लंबा बनाया जा सकता था और पिंजरे के बाहर केले इधर-उधर रखे गए थे। चिंपांजी किलो तक नहीं पहुंच सकता था। केलों को देखकर चिंपांजी उन्हें लेने का प्रयास करने लगा किंतु बिना छोड़ो की सहायता से उन्हें प्राप्त करना कठिन था। यकायक चिंपांजी की दृष्टि छड़ो पर गई और उसने केलो और छड़ी के मध्य संबंध स्थापित कर लिया। उसने छड़ों को उठाया अचानक दोनों को एक दूसरे में फंसाया और उन्हें लंबा कर लिया तथा उन छड़ों की सहायता से केलों को अपनी ओर खींच कर प्राप्त कर लिया।
इस प्रकार कोहलर ने अपने प्रयोग में निष्कर्ष निकाला कि जीव संपूर्ण वातावरण का प्रत्यक्षीकरण करता है और उसके आधार पर उसमें सूझ उत्पन्न होती है उसमें वह अपनी समस्या का समाधान करना सीख लेता है। संक्षिप्त में क्षेत्र का प्रत्यक्षीकरण होना तथा क्षेत्र का पुनर्गठन करना ही सूझ या अंतर्दृष्टि है।

अंतर्दृष्टि सिद्धांत की विशेषताएँ-

  1. समस्यात्मक स्थिति का सर्वेक्षण
  2. समस्यात्मक स्थिति में हिचकिचाहट विश्राम एवं ध्यान का केंद्रीकरण करना
  3. परिवर्तित अनुक्रियाओं द्वारा प्रयास करना
  4. प्रथम अनुक्रिया उपयुक्त सिद्ध न होने पर अन्य अनुक्रिया करना
  5. उद्देश्य लक्ष्य अथवा प्रेरणा की ओर बार-बार ध्यान केंद्रित करना
  6. यकायक उपयुक्त अनुक्रिया अभिव्यक्त करना
  7. अनुकूलित अनुक्रिया की पुनरावृत्ति करना
  8. समस्या के आवश्यक पहलू पर ध्यान देने एवं अनावश्यक पहलुओं को त्याग देने की योग्यता आना

 गेस्टाल्ट वादियों के अनुसार अंतर्दृष्टि का सिद्धांत 5 संप्रत्यों पर कार्य करता है-

1. लक्ष्य 2. बाधा 3.तनाव 4.संगठन 5.पुर्नसंगठन

अंतर्दृष्टि के सिद्धांत का शिक्षा में योगदान-

  1. गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों को संज्ञानात्मक मनोविज्ञान का जनक भी कहा जाता है।
  2. यह सिद्धांत सीखने में रटने के सिद्धांत अथवा आदत बनाकर सीखने के सिद्धांत का विरोध करता है। यह समस्या समाधान विधि का आग्रह करता है।
  3. अंतर्दृष्टि सिद्धांत द्वारा सीखने से छात्र की मानसिक शक्तियों एवं क्षमताओं का विकास होता है । तुलना करना तर्क करना आदि मानसिक शक्तियों के लिए सिद्धांत उपयोगी है।
  4. क्रो एंड क्रो के अनुसार यह सिद्धांत किसी विषय वस्तु के उच्च ज्ञान की प्राप्ति में विशेष रूप से सहयोगी है।
  5. यह सिद्धांत व्याकरण शिक्षा में विशेष रूप से उपयोगी है तथा अंक गणित और रेखा गणित की समस्याओं के हल में भी यह सिद्धांत अपनी उपयोगिता रखता है।
  6. यह सिद्धांत ह्यूरिस्टिक पद्धति पर आधारित है अर्थात छात्र स्वयं खोज के मार्ग पर अग्रसर रहता है छात्र किसी नवीन  परिस्थिति समायोजन करने तथा समस्या को सुलझाने में अंतरदृष्टि से काम लेता है।

अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत की आलोचना-

सूझ का सिद्धांत व्यावहारिक शिक्षण में अत्यंत उपयोगी है किंतु इसकी भी कुछ कमियाँ है जो कि निम्न है-
1. अभ्यास के प्रभाव की उपेक्षा- इस सिद्धांत की यह सबसे बड़ी कमी है कि अभ्यास के प्रभाव की उपेक्षा करता है तथा केवल तर्क, सूझ, तुलना आदि को ही महत्व देता है।
2. अंतर्दृष्टि को यकायक मानना-प्रसिद्ध वैज्ञानिक आलपोर्ट का मानना है कि सूझ क्रिया अचानक में न होकर क्रमिक होती है।


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