पृष्ठ तनाव

द्रव की सतह पर स्थित अणुओं पर ऊपर की ओर कोई बल नहीं लगता है, किंतु नीचे स्थित अणुओं द्वारा उन पर आकर्षण बल लगाया जाता है, जिससे पृष्ठ पर स्थित अणु एक तनाव महसूस करते हैं। इस तनाव के कारण द्रव पृष्ठ अपना क्षेत्रफल कम करने की कोशिश करता है। द्रव पृष्ठ पर लगने वाले इस तनाव को ‘पृष्ठ तनाव‘ कहते हैं। पृष्ठ तनाव को T अथवा S द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

  • मात्रक – न्यूटन/मीटर” (N/m)
  • पृष्ठ तनाव का सूत्र = F/l 
  • विमीय सूत्र – MT-2

ससंजक बल – एक ही प्रकार के पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाले बल को ससंजक बल कहते हैंठोस में ससंजक बल का मान अधिक होता है और देशों में ससंजक बल का मान कम होने के कारण उनमें विसरण पाया जाता है।

आसंजक बल – भिन्न-भिन्न पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाले बल को आसंजक बल कहते हैं आसंजक बल के कारण ही जल किसी वस्तु को भी होता है।

पृष्ठीय ऊर्जा –

किसी द्रव के पृष्ठ में मौजूद अणु अपनी स्थिति की वजह से अपनी ऊर्जा के अलावा कुछ ऊर्जा ओर रखते हैं अर्थात द्रव के मुक्त पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल की यह अतिरिक्त ऊर्जा, पृष्ठ ऊर्जा कहलाती है।

पृष्ठीय ऊर्जा = किया गया कार्य / क्षेत्रफल

E = W / A

पृष्ठ तनाव का प्रभाव –

ताप का प्रभाव – ताप बढ़ाने पर द्रव का ससंजक बल का मान घट जाता है जिसके कारण उसका पृष्ठ तनाव भी घट जाता है। क्रांतिक ताप पर पृष्ठ तनाव शून्य होता है।

अशुध्दियों का प्रभाव – यदि द्रव में धूल, कंकड़ तथा चिकनाई + तेल या ग्रीस आदि अशुद्धियां उपस्थित होती हैं तो पृष्ठ तनाव का मान घट जाता है।

विलेयता का प्रभाव – पृष्ठ तनाव, द्रव में घोले गए पदार्थ और उसकी घुलनशीलता पर आधारित है।

संपर्क कोण –

किसी ठोस व द्रव के स्पर्श बिंदु से द्रव के तल पर खींची गई स्पर्श रेखा तथा उस ठोस के तल पर द्रव के भीतर खींची गई स्पर्श रेखाओं के मध्य बना हुआ कोण द्रव एवं ठोस के लिए स्पर्श कोण या संपर्क कोण कहलाता हैं। जो द्रव किसी ठोस को भिगो देते हैं उनका स्पर्श कोण न्यूनतम होता है तथा जो द्रव किसी भी ठोस को नहीं भिगोते हैं उनका स्पर्श कोण सर्वोत्तम होता है अर्थात जो द्रव ठोस को गीला कर देते हैं उनके लिए स्पर्श कोण का मान कम रहता है।

पृष्ठ तनाव के उदाहरण

  • साबुन, डिटर्जेण्ट आदि जल के पृष्ठ तनाव में कमी कर देते हैं, अतः वे मैल में गहराई तक चले जाते हैं, जिससे कपड़ा ज्यादा साफ होता है।
  • साबुन के घोल के बुलबुले बड़े नहीं बनते हैं क्योंकि जल में साबुन घोलने पर उसका पृष्ठ तनाव में कमी आ जाती है।
  • स्थिर जल की सतह पर मच्छरों का लार्वा तैरते रहते हैं, परन्तु जल में मिट्टी का तेल छिड़क देने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, जिससे लार्वा पानी में डूबकर मर जाते हैं।
  • समुद्र की लहरों को कम करने के लिए उन पर तेल डाल दिया जाता है।
  • पतली सुई पृष्ठ तनाव के कारण ही पानी पर तैर सकती है।
  • गरम सूप स्वादिष्ट लगता है, क्योंकि गरम सूप का पृष्ठ तनाव निम्न होता है, अतः वह जीभ के ऊपर सभी भागों में अच्छी तरह फैल जाता है।
  • पृष्ठ तनाव के कारण ही पानी से बाहर निकालने पर शेविंग ब्रश के बाल आपस में चिपक जाते हैं।

पृष्ठ तनाव के उपयोग –

  • मच्छरों का जल सतह पर बैठना
  • गोलीय तल पर अवतल भाग में अतिरिक्त दाब
  • डिटर्जेंट पर पृष्ठ तनाव
  • मोम की बतख का पानी पर तैरना