विद्युत उपकरण

विद्युत का उपयोग काफी समय से होता आ रहा है और निरंतर अन्वेषण कार्य के फलस्वरूप आज के युग में विभिन्न प्रकार के विद्युत् उपकरणों (Electrical Instruments) का इस्तेमाल होने लगा है।

विद्युत-हीटर –

यह जुल ऊष्मीकरण सिद्धांत पर कार्य करता है। जिस किसी प्रक्रिया में विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित किया जाता है उसे विद्युत्-तापन कहा जाता हैं। कमरे का तापन, खाना बनाना, पानी गरम करना तथा अन्य अनेकों औद्योगिक प्रक्रम आदि कार्य की लिए विद्युत तापन का प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार के वैद्युत तापकों में ऊष्मा पैदा करने का कार्य विद्युत प्रतिरोध द्वारा किया जाता है जो जूल तापन द्वारा ऊष्मा प्रदान करता है। किसी प्रतिरोध R से होकर I धारा प्रवाहित होती है तो उसमें प्रति सेकेण्ड I2R जूल ऊष्मा उत्पन्न होती है। आधुनिक विद्युत तापन की अधिकांश युक्तियों में तापक के रूप में नाइक्रोम तार का इस्तेमाल किया जाता है।

विद्युत इस्त्री –

विद्युत इस्त्री विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के सिद्धांत पर आधारित है। इस सिद्धांत में कहा गया है कि जब किसी चालक से विद्युत धारा का प्रवाहन किया जाता है, तो उसमें उपस्थित प्रतिरोध के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है। प्रतिरोध के द्वारा विद्युत ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। विद्युत इस्त्री या प्रेस मेँ तापन तन्तु (नाइक्रोम धातु की एक राॅड) लगी होती है। जिस का गलनांक काफी ज्यादा होता है। इसे एलीमेंट कहा जाता है। जो नाइक्रोम का बना होता है। जब विद्युत इस्त्री में लगे एलिमेंट में विद्युत धारा को प्रवाहित किया जाता है। तो यह गर्म होकर उसमें ऊष्मा उत्पन्न करता है। जो विद्युत इस्त्री में लगे धातु की प्लेट को गर्म कर देता है। विद्युत इस्त्री का उपयोग कपड़ों के सिलवट हटाने के काम आता है।

रेफ्रिजरेटर –

प्रशीतित्र (रेफ्रिजरेटर या फ्रिज) एक घरेलूकार्य में उपयोग की जाने वाली एक युक्ति है जो सब्जी तथा खाद्य पदार्थों आदि को ठण्डा बनाये रखकर उनको जल्दी खराब न होने में सहायता करता है। यह संपीडन (compression) के सिद्धांत तथा अवशोषण (absorption) के सिद्धांत पर कार्य करते है। इनमे R – 438 फ्रीऑन (Freon) गैस का इस्तेमाल किया जाता है। इनके भीतर वाष्पित्र भाग में भरा प्रशीतक-द्रव गैस रूप में परिणत होते समय खाद्यकक्ष की गरमी का अवशोषण कर उसके ऊपर लगी संघनक कुंडलियों में, जो सदैव हवा के संपर्क में रहती हैं, जाकर, संघनित होकर दुबारा द्रव बन जाता है। इनमें एक तापस्थापी (thermostat) नामक उपकरण भी लगा रहता है, जिसके द्वारा खाद्यकक्ष के ताप पर नियंत्रण रखा जा सकता है।

विद्युत पंखा –

यह एक विद्युतचालित उपकरण है। यह घूर्णन गति  पर कार्य करता है। इसका उपयोग गर्मी से रक्षा, हवा को बाहर निकालने (exhaust), शीतन (cooling) या अन्य गैसीय परिवहन आदि कार्यो के लिये किया जाता है।

यांत्रिक रूप से पंखा वह होता है जो एक “वेन” (vane) या वेनों का समूह को घुमाकर हवा की धारा उत्पन्न करता है। पंखे कम दाब उत्पन्न करके बहुत अधिक मात्रा (आयतन) में हवा का प्रवाह उत्पन्न करते हैं। इसके विपरीत गैस कम्प्रेसर अपेक्षाकृत अधिक दाब पर कम आयतन हवा देने के लिये बनाया जाता है।

वाशिंग मशीन –

वाशिंग मशीन अपकेन्द्रण के सिद्धांत पर कार्य करती है। धुलाई मशीन या वॉशिंग मशीन एक ऐसा घरेलू उपकरण है जिसका उपयोग कपड़े धोने के लिए किया जाता है। सूखी धुलाई और पराध्वनिक मार्जक (अल्ट्रासोनिक क्लीनर) के विपरीत घरेलू धुलाई मशीनें, कपड़े धोने के लिए पानी और सूखे अथवा तरल डिटर्जेंट (अपमार्जक) का उपयोग करती हैं।

बल्ब –

एक बल्ब तापदीप्ति के सिद्धांत पर काम करता है। यह तापदीप्ति के द्वारा प्रकाश पैदा करता है। गरम होने के कारण प्रकाश के उत्सर्जन को तापदीप्ति (incandescence) कहा जाता है। इसमें एक पतला फिलामेन्ट (तार) उपस्थित होता है जिसका निर्माण टंगस्टन धातु से किया जाता है जिससे होकर जब धारा बहती है तब यह गरम होकर प्रकाश देने लगता है। फिलामेन्ट को काँच के बल्ब के अन्दर इसलिये रखा जाता है ताकि ज्यादा तप्त फिलामेन्ट तक वायुमण्डलीय आक्सीजन न पहुँचे और इस तरह क्रिया करके फिलामेन्ट को कमजोर न बना सके।

माइक्रोवेव –

यह सूक्ष्मतरंग विकिरण सिद्धांत पर आधारित है। सूक्ष्मतरंग चूल्हा, या माइक्रोवेव चूल्हा रसोईघर का एक ऐसा उपकरण है जो कि खाना पकाने और खाने को गर्म करने का कार्य करता है। इस कार्य के लिये इसमें द्विविद्युतीय (dielectric) उष्मा का इस्तेमाल किया जाता है। यह सूक्ष्मतरंग विकिरण का उपयोग करके खाने के भीतर उपस्थित पानी और अन्य ध्रुवीय अणुओं को गर्म करता है। यह गर्मी पूरे भोजन मे काफी हद तक समान रूप से फैलती है (मोटी वस्तुओं को छोड़कर)। मैग्नेट्रॉन इसका मुख्य अवयव है जो सूक्ष्मतरंगे पैदा करता है।

इंडक्शन चूल्हा –

इंडक्शन चूल्हा इलेक्ट्रो मेग्नेटिक इंडक्शन के सिद्धांत पर काम करता है। इसका निर्माण नाइक्रोम (Nichrome) के तार की बनी हुई कुंडलियों से होता है। नाइक्रोम निकेल, लोहा और क्रोमियम धातुओं से बना एक मिश्रधातु होता है। इसका विशिष्ट प्रतिरोध और गलनांक बहुत उच्च होता है। इसके दोनों सिरों को किसी विद्युत स्रोत में लगे प्लग क्रमशः ऋण और धन दोनों से स्पर्श कर दिया जाता है। कुंडली से होकर धारा प्रवाहित होने से कुंडली काफी गर्म होकर लाल हो जाती है जो चूल्हे की तरह काम करती है।

टेलीविजन –

टेलीविज़न एक वैज्ञानिक उपकरण है जो मुख्य रूप से दृष्टि-निर्बन्ध के सिद्धान्त पर आधारित है। टेलीविजन जन-संचार का दृश्य-श्रव्य माध्यम है। ध्वनि के साथ-साथ चित्रों के सजीव प्रसारण की वजह से यह अपने कार्यक्रम को रुचिकर बना देता है। जिस वस्तु या व्यक्ति का बिम्ब टेलीविज़न के माध्यम से प्रसारित करना होता है, उस पर बहुत तेज़ प्रकाश डाला जाता है। वस्तु या व्यक्ति की तस्वीर को क्रम में विभाजित कर छोटे-छोटे विभिन्न घनत्वों वाले अवयव में बदल दिये जाते हैं तथा उनकी संगत तरंगों का माडुलन कर एक निश्चित दिशा में प्रेषित द्वारा संचारित किया जाता है। ग्राही द्वारा छोटे-छोटे उसी क्रम में इन अवयवों को जोड़कर मूल तस्वीर प्राप्त कर ली जाती है। जैसा की हमारी आँखों के सामने एक सेकेण्ड में 20-25 क्रमिक परिवर्तन वाले चित्र के गुजरने पर वह गतिमान चित्र के रूप में दिखता है।