विद्युत परिपथ

विद्युत अवयवों (जैसे – संधारित्र एवं कुंजियों, प्रतिरोध, प्रेरकत्व, वोल्टेज स्रोत आदि) एवं विद्युतयांत्रिक अवयवों का परस्पर संयोजन को विद्युत परिपथ (Electric circuit) या विद्युत नेटवर्क (electrical network) कहा जाता है। विद्युत परिपथ बहुत बड़े क्षेत्र में फैले हुए होते हैं उदहारण के लिए – विद्युत-शक्ति के ट्रान्समिसन, विद्युत-शक्ति के उत्पादन, वितरण एवं उपभोग का नेटवर्क। बहुत से विद्युत परिपथ का प्रिन्टेड सर्किट बोर्डों पर संयोजित किये जाते हैं। विद्युत परिपथ का आकार बहुत छोटा भी हो सकता है जैसे – एकीकृत परिपथ।

जब किसी परिपथ में ट्रान्जिस्टर, आईसी या डायोड आदि लगे हुए रहते हैं तो वह परिपथ एलेक्ट्रॉनिक परिपथ कहलाता है जो कि विद्युत परिपथ का ही एक स्वरुप होता है। विद्युत परिपथ को परिपथ आरेख (सर्किट डायग्राम) के द्वारा व्यक्त किया जाता है। प्रायः एक या अधिक बन्द लूप वाले नेटवर्क को ही विद्युत परिपथ कहा जाता हैं। बहुत से विद्युत या इलेक्ट्रॉनिक घटकों या अवयवों से मिलकर विद्युत परिपथ का निर्माण किया जाता हैं।

परिपथों में दो प्रकार से घटक जोड़े जा सकते हैं: –

  • श्रेणीक्रम
  • समानांतरक्रम

श्रेणीक्रम संयोजन

श्रेणीक्रम संयोजन में जब विद्युत के दो या अधिक घटको को इस प्रकार जोड़ा जाता है जिसमे प्रत्येक घटक से समान ही धारा का प्रवाहन होता है तथा प्रत्येक घटक का कार्यरत होना आवश्यक है, अन्यथा परिपथ नष्ट हो जायेगा। अर्थात, श्रेणीक्रम में जुड़े सभी अवयवों में हर समय एक समान धारा बहती है। किन्तु उन अलग-अलग घटकों के सिरों के बीच का विभवान्तर उन घटकों के विद्युतीय गुणों (प्रतिरोध, प्रेरकत्व, धारिता, या V-I गुणधर्म) पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिये यदि 10 ओम, 20 ओम और 50 ओम के तीन प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ा हो और 10 ओम वाले प्रतिरोध में 2 एम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो तो 20 ओम एवं 50 ओम वाले प्रतिरोधों में भी 2 एम्पीयर धारा प्रवाहित हो रही होगी। किन्तु इन तीनों प्रतिरोधकों के विभवान्तर भिन्न-भिन्न (क्रमश: 20 वोल्ट, 40 वोल्ट तथा 100 वोल्ट) होंगे।

प्रतिरोध में

Rtotal = R1 + R2 + R3 + . . . + Rn

प्रेरकत्व (इंडक्टर्स) में

Ltotal = L1 + L2 + . . . + Ln

संधारित्रों में

1/Ctotal = 1/C1 + 1/C2 + . . . + 1/Cn * frac

समानांतर क्रम –

समान्तर क्रम में जोड़े गए एक से ज्यादा ‘दो सिरों वाले‘ विद्युत अवयवों में प्रत्येक के सिरों के मध्य का विभवान्तर बराबर होता है किन्तु इनमें प्रवाहित होने वाली धारा भिन्न – भिन्न हो सकती है जो उन अवयवों के प्रतिरोध, प्रेरकत्व, धारिता एवं अन्य बातों पर निर्भर करती है। समानांतर परिपथ में प्रत्येक घटक पर समान वोल्टता होती है तथा इसमें कोई भी घटक में गड़बड़ होने पर भी अन्य घटक कार्यरत रहेंगे, किन्तु किसी भी घटक को शॉर्ट सर्किट होने पर पूरा परिपथ नष्ट हो सकता है। घरों में लगे हुए पंखे, बिजली के बल्ब, ट्यूबलाइट आदि को भी समान्तर क्रम में जोड़ा जाता हैं।

Itotal = V (1/R1 + 1/R2 + . . . + 1/Rn)

प्रतिरोध में

1/Rtotal = 1/R1 + 1/R2 + . . . + 1/Rn

इंडक्टर्स में

1/Ltotal = 1/L1 + 1/L2 + . . . + 1/Ln

संधारित्रों में

Ctotal = C1 + C2 + . . . + Cn