कंप्यूटर नेटवर्किंग

जब दो या दो से अधिक कंप्यूटर को जब किसी माध्यम (wire और wireless) के द्वारा एक दूसरे के साथ जोड़ा जाता है तो उसे कंप्यूटर नेटवर्क कहा जाता हैं।

नेटवर्क के प्रकार –

Local Area Network (LAN)

Local Area Network का उपयोग काफी ज्यादा होता है क्योकि यह एक निश्चित और छोटे geographic area में computer को जोड़ने का कार्य करता है। इस नेटवर्क का उपयोग एक ऑफिस, फैक्ट्री, स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय कैंपस में कुछ किलोमीटर क्षेत्र तक ही सीमित होता है। Local Area Network पर नियंत्रण कोई किसी एक व्यक्ति या संस्थान का होता है। इसका आकार अथवा क्षेत्र काफी छोटा होता है लेकिन डाटा ट्रांसफर की स्पीड काफी तेज होती है और इसमें error कम उत्पन्न होती है।

LAN का उपयोग data sharing, printer sharing, data storage, document printing आदि कार्य करने के लिए किया जाता है। एक लोकल एरिया नेटवर्क को स्थापित करने के लिए बहुत ज्यादा Hardwares की आवश्यकता नहीं पड़ती है, केवल HUB, Switch, Network Adapter, Router या Ethernet Cable के द्वारा भी इसको बनाया जा सकता हैं। LAN में एक साथ 1000 कंप्यूटर को आपस में जोड़ा जा सकता हैं। LAN का उपयोग Ethernet Cable के द्वारा किया जाता है। परन्तु आजकल इसका use Wireless में भी हो रहा है।

इस प्रकार छोटे क्षेत्र के लिए लोकल एरिया नेटवर्क सबसे अच्छा नेटवर्क होता है। LAN में कंप्यूटर को जोड़ने के लिए Bus Topology और Coaxial Cable का उपयोग किया जाता है। छोटे क्षेत्र में फैलने के कारण इसमें रख रखाव करना बहुत आसान होता है।

Metropolitan Area Network (MAN)

यह किसी बड़े geographical area में स्थित कंप्यूटर को आपस में जोड़कर एक नेटवर्क का निर्माण करते है, जिसे मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क (MAN) कहा जाता हैं। इसके द्वारा एक ही शहर में स्थित स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल आदि को आपस में नेटवर्क से जोड़ा जाता है।

Wide Area Network (WAN)

वाइड एरिया नेटवर्क के द्वारा पूरे देश या पूरी दुनिया में फैले कंप्यूटरों को जोड़ने वाला नेटवर्क हैं। लोकल एरिया नेटवर्क और मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क को जोड़कर वाइड एरिया नेटवर्क का निर्माण किया जाता है। यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है जो पूरी दुनिया के कंप्यूटर को आपस में जोड़ कर रखता है। WAN का सबसे अच्छा उदाहरण इंटरनेट हैं।

कंप्यूटर नेटवर्किंग के उपकरण –

HUB

अलग-अलग हार्डवेयर डिवाइसेज को आपस में जोड़ने के लिए हब का उपयोग किया जाता हैं। हब के द्वारा दो या दो से अधिक नेटवर्क को आपस में जोड़ा जा सकता हैं ताकि डाटा का आदान प्रदान किया जा सकें। HUB में कई Ports मौजूद होते हैं और किसी एक पोर्ट पर आने वाला डाटा इसके प्रत्येक पोर्ट पर उपलब्ध रहता है। जहा से नेटवर्किंग के द्वारा जुड़े हुए सभी Computers में डाटा को प्राप्त किया जा सकता है।

Switch

Switch भी एक हार्डवेयर device होती है, जो विभिन्न कंप्यूटरों को नेटवर्किंग के द्वारा जोड़ता है। स्विच, हब से ज्यादा intelligent होता हैं। क्योंकि हब केवल डाटा पैकेट को Forward करता है, लेकिन Switch डाटा पैकेट को फॉरवर्ड करने के साथ-साथ उसे Filter भी करता है।

Bridge

यह समान प्रोटोकॉल का उपयोग करने वाले दो LAN (Local Area Network) को आपस में जोड़ने का कार्य है। यह प्रत्येक डाटा पैकेट की जाँच कर उन्हें उसी LAN को भेजने का कार्य करता हैं जिसके लिए डाटा बना होता हैं।

Router

इंटरनेट पर डाटा संकेतों को पैकेट के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। राउटर डाटा पैकेट्स को छोटे और सबसे तेज मार्ग द्वारा निर्धारित स्थान तक पहुंचाने का कार्य करता है। राउटर, सॉफ्टवेयर की मदद से नेटवर्क पर भेजे गए डाटा पैकेट पर लिखें IP Address को जांच कर उसे उसकी सही दिशा में भेजता है। राउटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों के मिश्रण से कार्य करता है। यह दो नेटवर्क को आपस में Wire या Wireless के माध्यम से जोड़ता हैं। वर्तमान मे अधिकतर Wireless Router का ही उपयोग किया जा रहा हैं।

Modem

मॉडम का उपयोग इंटरनेट चलाने के लिए ज्यादा किया जाता है। मॉडम टेलीफोन लाइन के माध्यम से कंप्यूटर को नेटवर्क से जोड़ने का कार्य करता है। टेलीफोन लाइन सिर्फ एनालॉग डाटा को ही समझता है। जबकि कंप्यूटर डिजिटल डाटा मतलब Binary number (0 और 1) को समझता है। मॉडम, कंप्यूटर में बनने वाले डिजिटल डाटा को एनालॉग डाटा में बदलता हैं, और उसे टेलीफोन लाइन पर भेजा जाता है। जिसके बाद टेलीफोन लाइन में प्राप्त एनालॉग डाटा को मॉडम, डिजिटल डाटा में बदलकर कंप्यूटर के उपयोग के योग्य बनता है, और दूसरे कंप्यूटर में भेज देता है।

Repeater

रिपीटर एक इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क डिवाइस हैं जो नेटवर्क सिग्नल पॉवर में वृद्धि करता है। यह डाटा को lost होने से बचाता है। यह एक ऐसा नेटवर्क डिवाइस हैं जो data signal को receive करता हैं और उसे re-transmit करता हैं। नेटवर्क में डाटा सिग्नल को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे डाटा signals के lost होने की संभावना बढ़ जाती है। रिपीटर की मदद से डाटा को बिना lost हुए दूर तक पहुंचाया जा सकता है।