ऑप्टिकल डिस्क

ऑप्टिकल डिस्क वह Secondary Storage Device होता है जिसमें डेटा को स्थायी रूप से स्टोर किया जा सकता है। ऑप्टिकल डिस्क में डेटा बाइनरी फॉर्म में संग्रहित होता है तथा इसमें डेटा को संग्रहित करने के लिए लेजर बीम तकनीकी का उपयोग किया जाता है। ऑप्टिकल डिस्क में डेटा को लम्बे समय तक सुरक्षित स्टोर करके रखा जा सकता है। ऑप्टिकल डिस्क गोल तथा चमकदार डिस्क होती है जिसका व्यास 3 इंच से 12 इंच तक हो सकता है। और इसकी मोटाई 0.05 इंच तक हो सकती है।

ऑप्टिकल स्टोरेज, इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज माध्यम जो डिजिटल (बाइनरी) डेटा को रिकॉर्ड करने और पुनर्प्राप्त करने के लिए कम-शक्ति वाले लेजर बीम का उपयोग करता है। ऑप्टिकल-स्टोरेज तकनीक में, एक लेजर बीम एक ऑप्टिकल, या लेजर, डिस्क पर डिजिटल डेटा को डिस्क की सतह पर एक Spiral Track में व्यवस्थित छोटे गड्ढों (Pits) के रूप में एन्कोड करता है।

ऑप्टिकल डिस्क के प्रकार –

1. कॉम्पैक्ट डिस्क/Compact Disc (CD) –

Compact Disc एक प्रकार का ऑप्टिकल डिस्क होता है जिसमें डेटा को Permanently संगृहीत किया जाता है। CD एक ऑप्टिकल ROM होती है , जिसमे डेटा पहले से ही निर्माता कंपनियों के द्वारा स्टोर किया जाता है, और यूजर CD में स्टोर डेटा को केवल Read कर सकते है उसमे कुछ write नहीं कर सकते। CD में डेटा को लेज़र लाइट द्वारा Read किया जाता है।

CD की स्टोरेज क्षमता लगभग 700 MB होती है जो Floppy डिस्क की तुलना में बहुत अधिक और DVD तथा Blue Ray Disc की तुलना में कम होती है।

VCD

  • CD को video CD , preview CD, compact Digital video भी कहते है।
  • यह compact disk पर video को store करने के लिए एक standard diogital format होता है,
  • V-CD का standard 1993 में sony, philips तथा JVC द्वारा बनाया गया था
  • यह V-CD, V-CD player computers Advance DVD video players तथा कुछ video game consoles में चलाये जा सकते है।
  • इसे white book standard के रूप मे दिया गया।

CD-R

  • CD-R का पूरा नाम compact disk recordable है।
  • यह philips तथा sony द्वारा दुबारा लिखने योग्य disk format होती है अर्थात इसमें information को पुनः writer किया जा सकता है।
  • इस प्रकार की disk में पहले से लिखे गये data को erase कर दिया जाता है उन्हीं track पर पुनः data को store किया जा सकता है।

CD-RW

  • CD-RW का पुरा नाम compact disk re-writable होता है
  • इसे 1997 में प्रस्तुत किया गया था यह दुबारा लिखने योग्य Disk format होता है अर्थात इसमें information को पुन writer किया जा सकता है।
  • इस प्रकार की Disk में पहले से लिखे गये data को erase कर दिया जाता है उन्ही track पर पुनः data को store किया जा सकता है।

2. डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क/Digital Versatile Disc (DVD) –

DVD का पूरा नाम Digital Versatile Disc होता है। DVD की स्टोरेज क्षमता CD की तुलना में काफी ज्यादा होती है। DVD की स्टोरेज क्षमता 4.7GB, 8.5GB और 20 GB तक हो सकती है।

DVD की स्टोरेज क्षमता इसके Layer पर निर्भर होती है। DVD की लेयर Single, Double, Single Side या Double Side प्रकार की हो सकती है। DVD में भी CD की भांति ही डेटा स्टोर करने के लिए लेज़र लाइट का उपयोग किया जाता है। इसके प्रत्येक लेयर में डेटा को स्टोर किया जाता है। CD की स्टोरेज क्षमता बहुत कम होती थी इसी के लिए DVD की आवश्यकता पड़ी।

3. ब्लू रे डिस्क/Blue – Ray Disc –

Blue Ray Disc एक प्रकार की Optical Disc है जिसमें हम बड़े आकार के डेटा को भी संगृहीत कर सकते हैं। आजकल Blue Ray Disc का उपयोग व्यापक रूप से Secondary Memory के लिए होता है। DVD की भांति ही Blue Ray Disc में डेटा को लेयर में संगृहीत किया जाता है। लेकिन DVD की एक लेयर में 4.7 GB डेटा को स्टोर किया जा सकता है लेकिन Blue Ray Disc की एक लेयर में 25 GB डेटा को स्टोर किया जा सकता है। Blue Ray Disc का उपयोग HD विडियो को स्टोर करने के लिए किया जाता है।

ऑप्टिकल डिस्क के फायदे –

  • ऑप्टिकल डिस्क Volatile और Non-Volatile मेमोरी की तुलना में अधिक लम्बे सा,आय तक चलती है। पॉवर सप्लाई बंद होने पर इसमें डेटा के नष्ट होने का खतरा नहीं रहता है। ऑप्टिकल डिस्क कई सालों तक सुरक्षित रहती है।
  • ऑप्टिकल डिस्क का उपयोग विभिन्न कंप्यूटर और डिवाइस में होता है।
  • ऑप्टिकल डिस्क में स्टोर डेटा का यूजर बड़ी आसानी से अपने कंप्यूटर में बैकअप बना सकता है।
  • ऑप्टिकल डिस्क को बनाने की लागत कम होती है क्योंकि इसमें केवल प्लास्टिक और एल्युमीनियम का उपयोग होता है।