हार्ड डिस्क

हार्ड डिस्क (Hard disk) को हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard disk drive) भी कहा जाता है। यह एक नॉन वोलेटाइल (non volatile) मेमोरी हार्डवेयर डिवाइस होती है। किसी भी कंप्यूटर में हार्ड डिस्क का कार्य उसमें संग्रहित जानकारी एवं डाटा को संरक्षित करना होता है। हार्ड डिस्क में यह जानकारी एवं डाटा स्थाई रूप से भंडारण एवं संरक्षित किया जा सकता है। इस जानकारी को यहां से फिर से प्राप्त कर सकते है। लंबे समय के लिए हार्ड डिक्स में किसी भी जानकारी एवं डाटा को संग्रहित करके रखा जा सकता है।

अन्य मेमोरी उपकरण की तरह डिवाइस को switch off करने के बाद भी इसमें डाटा एवं जानकारी सुरक्षित रहती है अर्थात नष्ट नहीं होती। हार्ड डिस्क secondary memory भी कहा जाता है।

हार्ड डिस्क के प्रकार –

PATA (Parallel advanced technology attachment) –

इस तरह के हार्ड डिस्क ड्राइव में इंटीग्रेटेड ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक (IDE – integrated drive electronic) लगा हुआ होता है।इसमें दो केबल मौजूद होते हैं। मैग्नेटिज्म की सहायता से यह डिस्क ड्राइव में डाटा को संग्रहित किया जा सकता है। इस डिस्क ड्राइव में 40 पिन और 8-bit डाटा को एक ही सेकंड में भेजा जा सकता था।

SATA (Serial advanced technology attachment) –

इस तरह के हार्डडिस्क में लगाई गई केबल अत्यधिक ही पतली और फ्लैक्सिबल होती थी। इस तरह के हार्ड डिस्क ड्राइव कीमत में भी काफी सस्ती होती थी। इसे सरलता से किसी भी पर्सनल कंप्यूटर में जोड़ा जा सकता था। वर्तमान समय में बनाए जाने वाले कंप्यूटर और लैपटॉप में इसी प्रकार के हार्ड डिस्क लगाए जाते हैं। इस तरह की हार्ड डिस्क से डाटा ट्रांसफर भी काफी तेजी से होता है। इस तरह के हार्ड डिस्क में डाटा ट्रांसफर की गति 150 MB/s से लेकर के 600 MB/s कि गति से डाटा को ट्रांसफर किया जा सकता था।

SSD (Solid state drive) –

इस प्रकार की हार्ड डिस्क की कीमत बाकी हार्ड डिस्क से काफी ज्यादा होती है। हालांकि, इसकी संग्रहण करने की क्षमता कम होती है। लेकिन यह बाकी हार्ड डिस्क की अपेक्षा काफी बेहतर और ज्यादा तेज गति से डेटा को ट्रांसफर करने के लिए उपयोग जाती है। इसमें हार्ड बेस में फ्लैश मेमोरी तकनीक (flash Memory technology) का उपयोग किया जाता है। इस तरह के हार्ड डिस्क में मूविंग पार्ट्स नहीं पाए जाते हैं इसलिए या हार्ड डिस्क ड्राइव की तुलना में अधिक तेज गति से डेटा को ट्रांसफर कर सकता है। इस हार्ड डिस्क ड्राइव में एक मेमोरी कार्ड की तरह चिप लगा हुआ होता है। जिस से डाटा को ट्रांसफर करने की या उसे कॉपी करने की स्पीड काफी तेज होती है।

SCSI (Small computer system interface) –

इस तरह के हार्डडिस्क का उपयोग छोटे कंप्यूटरों में होता है। इस तरह के हार्ड डिस्क भी इंटीग्रेटेड ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स के समान ही कार्य करते हैं। इस हार्ड डिस्क ड्राइव अधिकतम डाटा ट्रांसफर करने की गति 640 mb प्रति सेकेंड तक होती है। इस तरह के हार्ड डिस्क ड्राइव में एक केबल के द्वारा ही 16 हार्ड डिस्क ड्राइव को जोड़ा जा सकता है।

हार्ड डिस्क ड्राइव भाग

Actuator – इसकी सहायता से हार्ड डिस्क ड्राइव में मौजूद रीड राइट आर्म (read write arm) में घूर्णन होता है।

Circuit Board – किसी भी हार्ड डिस्क ड्राइव में सर्किट बोर्ड लेटर से डाटा के प्रभाव को नियंत्रित कर सकता है। Read write arm के घूमने के दौरान यह डाटा का नियंत्रण करता है।

Spindle – हार्ड डिस्क ड्राइव में लगी यह एक तरह की मोटर होती है। जो प्लैटर के बीच में स्थित होती है इसकी सहायता से प्लैटर घूमता है।

Connector – हार्ड डिस्क ड्राइव में कनेक्टर का काम सर्किट बोर्ड तक read write and plater तक डाटा को पहुंचाना होता है।

Read write arm – यह हार्ड डिस्क ड्राइव में रीड राइट हेड का पीछे का भाग होता है। यह दोनों आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। प्लैटर पर घूमते वक्त रीड राइट अर्म की सहायता से यह डाटा को ट्रांसफर करता है।

HSA – यह एक तरह से read-write arm के लिए एक पार्किंग एरिया का काम करता है।

Read write Head – यह एक छोटा सा मैग्नेट होता है जो कि रीड राइट आर्म के आगे लगा हुआ होता है। यही प्लैटर के ऊपर घूमता है और डाटा को plater पर सुरक्षित या रिकॉर्ड करता है।

Magnetic platters – किसी भी हार्ड डिस्क ड्राइव का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। मैग्नेटिक plater पर ही जानकारी एवं डाटा सजों कर रखी जाती है।

Logic board – यह एक तरह का लॉजिकल चिक होता है। जो हार्ड डिस्क ड्राइव से इनपुट और आउटपुट सभी तरह की जानकारी को सुरक्षित रखी है।