पनामा एवं स्वेज नहर

पनामा नहर

पनामा नहर पनामा में स्थित एक मानव द्वारा निर्मित एक नहर है जो प्रशांत महासागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ने का कार्य करती है। पनामा नहर के कारण जहाज़ों को दक्षिण अमेरिका के हार्न अंतरीप की परिक्रमा करने की आवश्यकता नहीं और उनके काफी समय और ईंधन की बचत होती है। यह नहर संसार के व्यस्ततम जलमार्गों में से एक जलमार्ग है। इस नहर का निर्माण पनामा स्थल डमरू मध्य को काट कर किया गया है।

  • लम्बाई – 72 किलोमीटर
  • चौड़ाई – 90 मीटर
  • न्यूनत्तम गहराई – 12 मीटर

पनामा नहर का इतिहास –

पनामा नहर को बनाने का प्रयास कई बार किया गया। स्पेन के राजा और रोमन साम्राज्य के सम्राट चार्ल्स पंचम ने 1534 इस योजना के सर्वेक्षण के आदेश जारी किये परन्तु इस मार्ग को बनाने का प्रथम प्रयास 1658 में स्कॉटलैंड के द्वारा किया गया था परन्तु खराब परिस्थितियों और दशाओं के कारण इसे 1700 में छोड़ दिया गया। 1855 में विलियम कनिश के सर्वेक्षण और 1877 में आर्मंड रेक्लास और लुसियन के सर्वेक्षणों ने इस प्रयास को आगे बढ़ाया।

बाद में 1881 में स्वेज नहर के निर्माणकर्ता फरडीनैंड डी लेसप के नेतृत्व में इसका निर्माण शुरू कराया। किन्तु इसमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और लगभग 22000 लोगों की मृत्यु हो गयी तथा इसके बाद इसे छोड़ दिया गया। फिर एक कंपनी कम्पनी नौवेल्ले दू कैनाल डे पनामा द्वारा प्रयास किया गया किन्तु वह प्रयास भी असफल हुआ। बाद में अमेरिकी सरकार ने कोलंबिया सरकार के साथ समझौता करके 1904 में इसका कार्य शुरू कराया और इस तरह से 1914 में इसे पूरा किया गया।

पनामा नहर के लाभ –

  • पूर्वी अमेरिका और पश्चिमी अमेरिका के बीच की दुरी काफी कम हो गयी।
  • इस नहर के द्वारा 8000 मील की दुरी कम हो सकती है।
  • इस नहर की वजह से जहाज़ों को दक्षिण अमेरिका के हॉर्न अंतरीप के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • पनामा नहर को पार करने में जहाज़ों को करीब 8 घंटे का समय लगता है।

स्वेज नहर

स्वेज नहर एक कृत्रिम जलमार्ग है जो भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ता है। नहर इस्तमुस (इस्थमुस भूमि की एक संकीर्ण पट्टी है जो मिस्र में स्थित स्वेज के दो बड़े भूभागों को जोड़ती है और पानी के दो बड़े निकायों को विभाजित करती है) के द्वारा निकलती है। पनामा नहर के विपरीत, स्वेज नहर भौगोलिक रूप से बहुत सरल है क्योंकि यह समुद्र के स्तर को बनाए रखती है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापार मार्गों में से एक है क्योंकि यह एशिया को यूरोप से जोड़ता है।

  • लम्बाई – 168 किलोमीटर
  • चौड़ाई – 60 मीटर
  • गहराई – 16.5 मीटर

स्वेज नहर का इतिहास

स्वेज नहर का निर्माण लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ने के लिए किया गया है। इसका निर्माण 1858 में शुरू होकर लगभग दस वर्षों में पूरा हुआ। इसका निर्माण एक फ़्रांसिसी इंजीनियर फर्डिनैंड की निगरानी में हुआ। स्वेज नहर पनामा नहर से करीब दो गुना लम्बी है। सन 1869 में इस नहर को यातायात के लिए खोला गया। प्रारम्भ में इस नहर का उपयोग केवल दिन के समय में ही होता था किन्तु 1887 से इसमें से रात में भी जहाज पार होने लगें। प्रारम्भ में इस नहर को पार करने में 36 घंटे का समय लगता था परन्तु वर्तमान में इससे पार करने में जहाज़ों को 12 से 16 घंटे का समय लगता है।

स्वेज नहर के लाभ –

  • पूर्वी अफ्रीका, ईरान, अरब, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों का यूरोप और अमेरिका से सीधे रास्ते का निर्माण हुआ। इसके पहले इन देशों के जहाज़ों को पुरे अफ्रीका महादेश की परिक्रमा करनी पड़ती थी।
  • स्वेज नहर ने लगभब 6000 मील की दुरी को कम कर दिया है।
  • इस नहर की वजह से जहाँ समय कम लगता है वहीँ ढुलाई का खर्च भी कम हो गया।
  • इस नहर ने व्यापार को सरल और तीव्र बनाया है।