भारत का संवैधानिक इतिहास – पार्ट 2

1853 का चार्टर अधिनियम

  • बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में सदस्यों की संख्या बढाई गई।
  • पी. डब्यु. डी. तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग बनाया गया।
  • सिविल सेवकों की खुली भर्ती परिक्षा आयोजित करने का प्रावधान।

1858 का अधिनियम

  • 1857 की क्रांति के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन समाप्त कर भारत का शासन सीधे ब्रिटीश ताज के अधीन किया गया।
  • गर्वनर जनरल ऑफ़ इण्डिया को वायसराय की पद्वी दी गई।
  • लार्ड कैनिन भारत के पहले वायसराय बने।
  • एक भारत-सचित का पद सृजित किया गया। जिसकी कार्यकारिणी में 15 सदस्य रखे गए। 7 मनोनित और 8 निर्वाचित।
  • बोर्ड ऑफ़ डाॅयरेक्टर्स एवं बोर्ड ऑफ़ कन्ट्रोल को समाप्त कर दिया गया।
  • भारत सचिव चाल्र्स वुड को बनाया गया।
  • इन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए वुड डिस्पेच दिाया जिसमें प्राथमिक प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देना निर्धारित था। इसलिए वुड डिस्पेच को “शिक्षा का मैग्नाकार्टा” कहा जाता है
  • बम्बई, कलकत्ता और मद्रास में विश्व विद्यालयों की स्थापना की गई।

1861 का भारत शासन अधिनियम

  • भारत की राजधानी कलकत्ता में केन्द्रीय विधान परिषद बनाई गई और वायसराय या गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या 6 से 12 के मध्य रखी गई।
  • बम्बई, मद्रास, और कलकत्ता में हाईकोर्ट की स्थापना की गई।
  • वायसराय को अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया गया। जो 6 माह से अधिक लागू नहीं रह सकता था।
  • विभागीय वितरण प्रणाली लागू की गई।(लार्ड कैनिंग के द्वारा)

1892 का भारत – परिषद अधिनियम

  • 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद सुधार की मांगे निरन्तर तीव्र होती चली गई। और अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्वति को प्रारम्भ किया गया। अर्थात् बड़े उद्योगपति, जमीदार और व्यापारी गैर सरकारी सीटों के लिए चुनाव लड़ सकते है।
  • बजट पर बहस करने का अधिकार दिया गया। लेकिन मत देने का अधिकार नहीं था।

1909 का मार्लेमिन्टो सुधार अधिनियम

जोन मार्ले भारत सचिव और लार्ड मिन्टो वायसराय थे। इन्होंने सुधार कानून दिया जिनके प्रावधान निम्न है।

  • मुसलमानों को साम्प्रदायिक निर्वाचन क्षेत्र दिए गए। और एस. पी. सिन्हा को वायसराय या गर्वनर-जनरल की कार्यकारिणी में शामिल किया गया।

1919 का भारत शासन अधिनियम

  • इसे मान्टेस्क्यू चेम्सफोर्ड सुधार कानून भी कहा गया। इसकी घोषणा 20 अगस्त 1917 से प्रारम्भ की गई। जिसके प्रावधान निम्नलिखित थे।
  • प्रान्तों में द्धेद्य शासन प्रारम्भ:- जनक – लियोनिल कार्टिस
  • विषयों का प्रारूप 2 भागों में बांटा गया।
    1.आरक्षित 2. हस्तांनान्तरित
  • आरक्षित विषयों पर गवर्नर जनरल और उसकी कार्यकारीणी का शासन था। जो किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं थी। इसमें प्रमुख विषय – रक्षा, वित, जेल, पुलिस, विदेशी संबंध , ईसाईयों के कानून, अंग्रेजी शिक्षा, सिंचाई आदि रखे गये।
    जैसे – स्थानीय शासन, मनोरंजन, कृषि, सहकारिता और पर्यटन।
  • भारत में द्विसदनीय विधायिका बनाई गई जिसका एक सदन केन्द्रीय विघानसभा जिसमें 104 निर्वाचित 41 मनोनित सदस्य थे। तथा दुसरा सदन राज्य परिषद रखा गया।जिसकी सदस्या संख्या 60 रखी गई। इसमें भी मनोनित 27 एवं निर्वाचित 33 सदस्य थे।
  • ब्रिटेन में एक हाईकमिश्नर का पर सृजित किया गया। राष्ट्रमंडल देशों के साथ मिलकर कमिश्नर की नियुक्ति की जाती है। भारत इसका सदस्य 1949 में बना।
  • फेडरल लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
  • महिलाओं को सिमित क्षेत्रों में मतदान डालनें का अधिकार दिया गया।
  • साम्प्रदायिक निर्वाचन का विस्तार किया गया।
  • यह अधिनियम 1 अप्रैल 1921 से प्रारम्भ हुआ और 1 अप्रैल 1937 तक रहा। बालगंगाधर तिलक ने इसे “एक बिना सूरज का अंधेरा” कहा।
  • इसकी समीक्षा के लिए 10 साल बाद एक राॅयल कमीशन के गठन का प्रावधान किया गया।

1935 का भारत शासन अधिनियम

  • 1928 की नेहरू रिपोर्ट
  • 1929 लाहौर अधिवेशन (पुर्ण स्वराज्य की मांग)
  • 1930,31,32 -तीन गोलमेज सम्मेलन
  • इन सभी को ध्यान में रखते हुए 1935 का भारत शासन अधिनियम लाया गया।
  • इसकी प्रमुख विशेषतांए निम्न है।
  • इसमें प्रस्तावना का अभाव था।
  • प्रान्तों में द्वैद्य शासन हटाकर केन्द्र में लगाया गया।
  • केन्द्र एंव राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन तीन सुचियों में किया गया।
    (A) केन्द्र सूची(97)
    (B) राज्य सुची(66)
    (C)समवर्ती सूची(47)
  • फेडरल सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई। जो अपील का सर्वोच्च न्यायालय नहीं था। इसके विरूद्ध अपील लंदन की प्रिवी कांउसिल में सम्भव थी।
  • रिजर्व बैंक आॅफ इण्डिया की स्थापना का प्रावधान किया गया।
  • उत्तरदायी शासन का विकास किया गया।
  • अखिल भारतीय संद्य की स्थापना का प्रावधान था।जिसमें देशी रियासतों का मिलना ऐच्छिक रखा गया। केन्द्रीय एंव राज्य विद्यायिकाओं का विस्तार किया गया।
  • पं. जवाहर लाल नेहरू ने इस अधिनियम को एक ऐसी मोटर कार की सज्ञा दी “जिसमें ब्रैक अनेक है लेकिन इंजिन नहीं।”
  • इसका लगभग 2/3 भाग आगे चलकर संविधान में रखा गया।


आर्टिकल पसंद आया तो शेयर करें
एंड कमेंट करें