भारत की जनगणना 2011

भारत की जनगणना 2011, जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली द्वारा राष्ट्र को समर्पित भारत की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना है, जो 1 मई 2010 को आरम्भ हुई थी। भारत में जनगणना की शुरुआत 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के अधीन पहली बार की गयी तथा सर्वप्रथम बायोमेट्रिक सूचना 2011 में इकट्ठी की गई। भारतीय संविधान की धारा 246 के अनुसार देश की जनगणना कराने की जिम्मेदारी सरकार को दी गयी या संविधान की 7वीं अनुसूची की क्रम संख्या 69 पर अंकित है जनगणना संगठन केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है जिसका उच्चतम अधिकारी भारत का महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त होता है यह देश भर में जनगणना संबंधी कार्यों को निर्देशित करता है।

2011 ईस्वी की जनगणना अर्थात 15वी जनगणना स्वतंत्र भारत की 7वीं जनगणना की शुरुआत महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के द्वारा 1 अप्रैल 2010 इसमें से हुई है सितंबर 2010 ई. को केंद्रीय मंत्रिमंडल जाति आधारित जनगणना (1931 ई. के बाद पहली बार) की स्वीकृति प्रदान की जो अलग से जून 2011 से सितंबर 2011 ई. के बीच संपन्न हुई थी।

  • राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या – 35
  • जिलों की सं. – 640 (वर्ष 2001 से 47 ज्यादा हैं )
  • शहरों की संख्या – 7,933 (वर्ष 2001 से 2772 ज्यादा हैं)
  • गांवों की संख्या – 6,40,930 (वर्ष 2001 से 2342 ज्यादा हैं)
  • कुल आबादी – 1,21,05,69,573 (68.8% शहरी और 31.2% ग्रामीण)
  • वर्ष 2001 से 2011 के बीच दशकीय जनसंख्या वृद्धि -17.64%
  • भारत में दुनिया की कुल आबादी – 17.5%

कानूनी/संवैधानिक प्रावधान:

  • इस अधिनियम का निर्माण करने के लिए विधेयक भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा पेश किया गया।
  • जनगणना का कार्य जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 246 के अंतर्गत जनगणना संघ का विषय है।
  • यह संविधान की अनुसूची 7 के क्रमांक 69 में सूचीबद्ध है।

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार लिंगानुपात –

  • भारत में लिंगानुपात – 940 (महिला) / 1000 (पुरुष)
  • सर्वाधिक लिंगानुपात वाले राज्य – केरल (1084), तमिलनाडु (996), आन्ध्र प्रदेश (993), मणिपुर (992), छत्तीसगढ़ (991)
  • न्यूनतम लिंगानुपात वाले राज्य – हरियाणा (878)
  • सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला – माहे ( पांडुचेरी ) (1176)
  • न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला – दमन (533)

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार साक्षरता –

  • भारत की साक्षरता दर – 74.0 %
  • पुरुष साक्षरता दर – 1%
  • महिला साक्षरता दर – 65.5 %
  • न्यूनतम साक्षरता दर वाले राज्य – बिहार (63.8%), अरुणाचल प्रदेश (67%), राजस्थान (67.1%), झारखंड
  • न्यूनतम पुरुष साक्षरता दर वाले राज्य – बिहार (73.4%), अरुणाचल प्रदेश (73.7%), आंध्रप्रदेश (75.6%)
  • सर्वाधिक साक्षरता दर वाले राज्य – केरल (93.9%), मिजोरम (91.6%)
  • सर्वाधिक पुरष साक्षरता दर वाले राज्य – लक्ष्यद्वीप (1%), केरल (96.0%), मिजोरम (93.7%)
  • सर्वाधिक महिला साक्षरता दर वाले राज्य – केरल (0%), मिजोरम (89.4%)
  • न्यूनतम महिला साक्षरता दर वाले राज्य – राजस्थान (52.7%), बिहार (53.3%), झारखंड (56.2%)
  • सर्वाधिक साक्षरता दर वाला जिला – सरचिप ( मिजोरम )
  • न्यूनतम साक्षरता दर वाला जिला – अलीराजपुर (म.प्र.)

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या घनत्व –

  • भारत की जनसंख्या घनत्व – 382/ व्यक्ति वर्ग किमी
  • सर्वाधिक घनत्व वाले राज्य – बिहार (1106 / वर्ग किमी), प. बंगाल (1028/ वर्ग किमी), केरल (860/ वर्ग किमी)
  • न्यूनतम घनत्व वाले राज्य – अरुणाचल प्रदेश (17/ व्यक्ति वर्ग किमी)
  • सर्वाधिक घनत्व वाला जिला – उत्तर पूर्व दिल्ली
  • न्यूनतम घनत्व वाला जिला – दिवांग घाटी ( अरुणाचल प्रदेश )

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश –

  • सर्वाधिक जनसँख्या वाला केंद्रशासित राज्य – दिल्ली (1.67 करोड़)
  • न्यूनतम जनसँख्या वाला केंद्रशासित राज्य – लक्ष्यद्वीप (47 हजार)
  • न्यूनतम जनसंख्या घनत्त्व वाला राज्य – अण्डमान (46/ वर्ग किमी)
  • सर्वाधिक साक्षरता वाला केंद शासित राज्य – लक्ष्यद्वीप (92.28%)
  • न्यूनतम साक्षरता वाला केंद्रशासित राज्य – दादर एवं नागर हवेली (77.65)

जनगणना का महत्त्व:

सूचना का स्रोत:

भारतीय जनगणना भारत के लोगों की विशेषताओं के बारे में अनेक प्रकार की सांख्यिकीय सूचना का सबसे बड़ा एकल स्रोत है। शोधकर्त्ता द्वारा जनसंख्या के विकास और प्रवृत्तियों का विश्लेषण करने और अनुमान लगाने के लिए जनगणना के आँकड़ों का उपयोग किया जाता है।

सुशासन:

जनगणना के माध्यम से इकठ्ठा की गयी सूचना का उपयोग प्रशासन, योजना और नीति निर्माण के साथ-साथ सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के प्रबंधन और मूल्यांकन के लिए भी किया जाता है।

सीमांकन:

जनगणना के आँकड़ों का उपयोग निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन और संसद, राज्य विधानसभाओं तथा स्थानीय निकायों के प्रतिनिधित्व हेतु आवंटन करने के लिये भी होता है।

व्यवसायों की बेहतर पहुँच:

व्यावसायिक घरानों और उद्योगों के लिये भी जनगणना के आँकड़े अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं, ताकि वे उन क्षेत्रों में भी अपने व्यवसाय को मज़बूती प्रदान करने के लिए योजना बना सकें जो अब तक उनकी पहुँच में नहीं थे।

अनुदान देना:

वित्त आयोग जनगणना के द्वारा उपलब्ध जनसंख्या के आँकड़ों के आधार पर राज्यों को अनुदान प्रदान करता है।