पंचायत समिति

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अनुसार पंचायत समिति मध्यवर्ती पंचायत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ग्राम पंचायत एवं जिला परिषद के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। जिस प्रकार केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के प्रशासनिक एवं विधायी से जुड़े सारे कार्य संविधान के नियमों के अनुसार संचालित किया जाता है, उसी प्रकार पंचायत समिति के सारे कार्य बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के विभिन्न धाराओं एवं नियमों के अनुकूल संचालित होता है।

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-34 से धारा-61 तक में पंचायत समिति के सारे कार्यो को शामिल किया गया है। पंचायत समिति का गठन प्रखंड स्तर पर होता है। ग्राम पंचायत की तरह प्रत्येक पंचायत समिति का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र होता है, जो लगभग 5000 की आबादी पर निर्धारित होता है।

पंचायत समिति की संरचना

लगभग 5000 की आबादी पर निर्धारित प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से पंचायत समिति के लिये एक प्रतिनिधि पंचायत समिति सदस्य के रूप में मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है। पंचायत समिति में प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से सीधे चुनकर आये हुए सदस्यों के अतिरिक्त और भी सदस्य होते है जो निम्नलिखित है :-

  • सम्बन्धित प्रखंड या इसके निर्वाचन क्षेत्र का आंशिक या पूर्ण प्रतिनिधित्व करने वाला लोक सभा एवं विधान सभा के सदस्य।
  • राज्य सभा एवं विधान परिषद के वे सदस्य जो पंचायत समिति क्षेत्र (प्रखंड) के अन्तर्गत निर्वाचक के रूप में पंजीकृत हों।
  • पंचायत समिति क्षेत्र (प्रखंड) में आने वाली सभी ग्राम पंचायत के मुखिया।
  • पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी होता है।

योग्यता –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • समान समय में किसी सरकारी कार्यालय के किसी पद पर ना हो
  • पागल या दिवालिया न हो
  • किसी न्यायलय द्वारा अयोग्य घोषित न किया गया हो।

पंचायत समिति की चुनावी प्रक्रिया –

पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य द्वारा अपने बीच से दो सदस्यो को प्रमुख और उप-प्रमुख के रूप में चुना जाता है। यदि प्रमुख और उप प्रमुख के पद किसी कारण से बाद में खाली हो जाए तो पुन: अपने में से प्रमुख एवं उप-प्रमुख का चुनाव किया जाता है।

शपथ ग्रहण

पंचायत समिति के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्यों को अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा शपथ ग्रहण करायी जाता है। निर्वाचित प्रमुख एवं उप-प्रमुख को भी प्रथम बैठक में ही शपथ ग्रहण कराई जाती है। प्रथम बैठक की तिथि का निर्धारण तथा अध्यक्षता भी वही करते है। प्रथम बैठक के बाद की सभी पंचायत समिति की बैठक की अध्यक्षता प्रमुख और उनकी अनुपस्थिति में उप-प्रमुख द्वारा की जाती है।

पंचायत समिति की कार्यावधि

पंचायत समिति की कार्यावधि पाँच वर्षो की होती है। इसकी पहली बैठक की तारीख से अगले पाँच वर्षो तक कार्यावधि होगी।

पंचायत समिति के कार्य

  • पंचायत समिति क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना बनाना एवं उसे जिला परिषद को सौंपना।
  • पंचायत समिति का वार्षिक बजट बनाना।
  • प्राकृतिक संकट में रिलीफ की योजना बनाकर उसका कार्यान्वयन करना।
  • कृषि, बागवानी, बीज फार्मा एवं कीटनाशी दवाओं का भंडारण एवं वितरण करना।
  • एकीकृत ग्रामीण विकास, कृषि, सामाजिक वानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, शिक्षा, सहकारिता, कुटीर उद्योग, महिला, शिशु एवं कमजोर वर्गो का कल्याण, रोजगार कार्यक्रम, खेलकूद, भवन निर्माण एवं लघु सिंचाई की योजना बनाकर कार्यान्वयन सुनिश्चित कराना।