हृदय (heart)

हृदय मानव शरीर का एक ऐसा हिस्सा है, जो परिसंचरण तन्त्र के माध्यम से सम्पूर्ण मानव शरीर में रक्त को पंप करने, ऊतकों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति करने और कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य अपशिष्ट को शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। हृदय की धड़कनों के आधार पर व्यक्ति के स्वास्थ्य का अनुमान लगाया जा सकता है। 

  • दिल छाती के केंद्र में स्थित है, जो आमतौर पर थोड़ा बाएं तरफ रहता है।
  • एक मानव हृदय मोटे तौर पर एक बड़ी मुट्ठी के आकार का होता है।
  • हृदय का वजन पुरुषों में लगभग 10 से 12 औंस (280 से 340 ग्राम) और महिलाओं में 8 से 10 औंस (230 से 280 ग्राम) होता है।
  • दिल प्रति दिन लगभग 100,000 बार धड़कता है। और प्रतिदिन शरीर में 2,000 गैलन (gallons) रक्त को पंप करता है।
  • एक वयस्क का दिल प्रति मिनट 60 से 80 बार धड़कता है।
  • नवजात शिशुओं के दिल वयस्क दिलों की तुलना में अधिक तेज धड़कते हैं, लगभग 70 से 190 बीट प्रति मिनट।

हृदय की संरचना 

मानव हृदय, मुट्ठी के आकार का एक पेशीय अंग (muscular organ) है, जो ब्रेस्टबोन (breastbone) के पीछे थोड़ा बाएं ओर होता है। हृदय सम्पूर्ण शरीर में धमनियों और शिराओं के जाल के माध्यम से रक्त को पंप करने का कार्य करता है, जिसे कार्डियोवास्कुलर सिस्टम (cardiovascular system) कहा जाता है।

हेनरी ग्रे (Henry Gray’s) के अनुसार, पुरुषों में हृदय (दिल) का भार लगभग 280 से 340 ग्राम और महिलाओं में 230 से 280 ग्राम तक हो सकता है।

दिल की बाहरी दीवार, तीन परतों से मिलकर बनी होती है-

  • एपिकार्डियम (epicardium) – यह दिल की सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत होती है, जो पेरिकार्डियम (pericardium) की आंतरिक दीवार है।
  • मायोकार्डियम (myocardium)– यह मध्य परत है, जो संकुचित होने वाली मांसपेशी से बनी होती है।
  • एंडोकार्डियम (endocardium) – यह हृदय की आंतरिक परत है,जो रक्त के संपर्क में रहती है।

कोरोनरी धमनियां (coronary arteries) हृदय की सतह पर पाई जाने वाली रक्त वाहिकाएं होती हैं और हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन युक्त रक्त प्रदान करने का कार्य करती हैं। तंत्रिका ऊतक की एक झिल्ली (अस्तर), जो हृदय को घेरे रहती है, पेरीकार्डियम (pericardium) कहलाती है। यह दोहरी दीवार वाली झिल्ली संकुचन और विश्राम को नियंत्रित करने वाले जटिल संकेतों का संचालन करती है, तथा हृदय की रक्षा करती है।

हृदय के कक्ष

मानव हृदय में चार कक्ष या चेंबर (प्रकोष्ट) होते हैं: दो ऊपरी कक्ष, जो रक्त ग्रहण करते हैं, उनको आलिन्द (Atria) कहा जाता हैं और दो निचले कक्ष, जो रक्त का निर्वहन करते हैं, उन्हें निलय (Ventricles) कहते है।

दायां आलिंद तथा दायां निलय आपस में मिलकर “दायें हृदय” का निर्माण करते हैं, और बायाँ अलिंद तथा बायाँ निलय आपस में मिलकर “बायाँ हृदय” का निर्माण करते हैं। सेप्टम नामक मांसपेशी (septum muscle) इन दोनों भागों को अलग करती है।

  • दायां आलिंद (right atrium) – दाहिने आलिंद (right atrium), रक्त कोशिरा (veins) से प्राप्त करता है, और इसे दाएं निलय (right ventricle) में पंप करता है।
  • दायां निलय (right ventricle) – दाएंनिलय (right ventricle) को दायें आलिंद (right atrium) से रक्त प्राप्त होता है, और यह निलय इस रक्त को फेफड़ों (lungs) में पंप करता है, जहां रक्त में ऑक्सीजन घुलती है।
  • बायां आलिंद (left atrium) – बायां आलिंद (left atrium), फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त को प्राप्त करने के बाद, रक्त को बाएं निलय (left ventricle) में पंप करता है।
  • बायां निलय (left ventricle) – बाएं निलय हृदय का सबसे मजबूत कक्ष होता है। बायां निलय शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन युक्त रक्त को पहुँचाने के कार्य करता है। बाएं निलय (left ventricle) का तेजी से संकुचन ही रक्तचाप को उत्पन्न करता है।

हृदय के वाल्व –

प्रत्येक मनुष्य के हृदय में चार वाल्व होते हैं, जो रक्त को केवल एक ही दिशा में बहने के लिए प्रेरित करते हैं।

  • महाधमनी वाल्व (Aortic valve) – यह बाएं निलय (left ventricle) और महाधमनी के बीच उपस्थित होता है।
  • माइट्रल वाल्व (Mitral valve) – यह बाएं आलिंद और बाएं निलय के बीच उपस्थित होता है।
  • पल्मोनरी वाल्व (Pulmonary valve) – यह दाएं निलय (right ventricle) और पल्मोनरी धमनी के बीच होता है।
  • ट्रिकस्पिड वाल्व (Tricuspid valve) – यह दाएं आलिंद (right atrium) और दाएं निलय (right ventricle) के बीच का वाल्व होता है।

हृदय की धड़कन की आवाज अर्थात “लब-डब ” ध्वनि का उत्पादन इन्ही वाल्व के कारण होता है। “लब ” की ध्वनि ट्रिकस्पिड वाल्व और माइट्रल वाल्व के बंद होने से आती है, और “डब ” ध्वनि पल्मोनरी और महाधमनी वाल्व के बंद होने के कारण आती है।

रक्त वाहिकाएं

रक्त वाहिकाएं तीन प्रकार की होती हैं:-

  • धमनियां (Arteries) –धमनियां हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने का कार्य करती है। यह मजबूत और लोचदार दीवार युक्त होती हैं।
  • शिराएं (Veins) – ये ऑक्सीजन रहित रक्त (deoxygenated blood) को वापस हृदय तक लाने का कार्य करती हैं। हृदय के पास पहुंचने पर शिराओं का आकार बड़ा हो जाता है। शिराओं में धमनियों की अपेक्षा पतली दीवार होती हैं।
  • केशिकाएं (Capillaries) – यह केशिकाएं, छोटी धमनियों और सबसे छोटी शिराओं को आपस में जोड़ने का कार्य करती हैं। इनकी बहुत पतली दीवार होती है, जो आसपास के ऊतकों से यौगिकों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, पानी, ऑक्सीजन, अपशिष्ट और पोषक तत्वों) का आदान- प्रदान करने की अनुमति देती है।

हृदय की कार्यविधि

  • हृदय का बायां और दायां भाग एकसमान रूप से कार्य करता है । दिल के दाहिने हिस्से को ऑक्सीजन रहित रक्त प्राप्त होता है, जिसे फेफड़ों में भेजा जाता है तथा दिल का बायां हिस्सा ऑक्सीजन युक्त रक्त को फेफड़ों से प्राप्त करता है और इसे शरीर के विभिन्न हिस्सों में पंप करता है।
  • मानव शरीर में उपस्थित अशुद्ध रक्त (ऑक्सीजन रहित रक्त), शरीर की सबसे बड़ी शिरा के माध्यम से दायें एट्रियम (atrium) या दायें अलिंद में प्रवेश करता है। वह शिरा जिसके माध्यम से अशुद्ध रक्त ह्रदय के दायें अलिंद में प्रवेश करता है, उसे सुपीरियर और इन्फीरियर वेना कावा (superior and inferior vena cava) के नाम से जाना जाता है।
  • इसके बाद दायां आलिंद सिकुड़ता है और रक्त को दाएं निलय में धकेलता है। दाएं निलय के रक्त से भरने के बाद पल्मोनरी वाल्व खुलता है। जिसके कारण अशुद्ध रक्त पल्मोनरी धमनी (pulmonary artery) से होता हुआ फेफड़ों तक पहुँचता है। यहाँ रक्त ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ता है।
  • फेफड़ों से शुद्ध रक्त या ऑक्सीजन युक्त रक्त पल्मोनरी शिरा (pulmonary vein) के माध्यम से दिल के बाएं हिस्से में उपस्थित बाएं आलिंद (left atrium) में प्रवेश करता है। इसके पश्चात बाएं आलिंद के सिकुड़ने से रक्त बाएं निलय में जाता है। जब बायां निलय रक्त से पूरी तरह से भर जाता है, तब महाधमनी (aorta) के माध्यम से शुद्ध रक्त को वापस शरीर में भेज दिया जाता है।