माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria)

इसकी खोज 1890 ई. में अल्टमेन (Altman) नामक वैज्ञानिक ने की थी। यह कोशिकाद्रव्य में पायी जाने वाली बहुत महत्वपूर्ण रचना है जो कोशिकाद्रव्य में बिखरी रहती है। अल्टमेन ने इसे बायोब्लास्ट तथा बेण्डा ने माइटोकॉण्डिया कहा। इसका आकार (size) और आकृति (shape) परविर्तनशील होता है। यह कोशिकाद्रव्य में कणों (Chondriomits), सूत्रों (Filament), छड़ों (Chondriconts) और गोलकों (Chondriospheres) के रूप में बिखरा रहता है। प्रत्येक माइटोकॉण्ड्रिया एक बाहरी झिल्ली एवं एक अन्तः झिल्ली से चारों ओर घिरी रहती है तथा इसके बीच में एक तरलयुक्त गुहा होती है, जिसे माइटोकॉण्ड्रियल गुहा (Mitochondrial cavity) कहते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या (Number of Mitochondria)

  • इसकी संख्या भिन्न-भिन्न कोशिकाओं में भिन्न-भिन्न होती है जैसे अधिक चयापचय गतिविधि वाले कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया की अधिक संख्या होती है।
  • आम तौर पर एक कोशिका में इनकी संख्या 1000-1600 होती है।
  • प्रोकैरियोटिक कोशिका, अनऑक्सी श्वसन करने वाली कोशिकाओं और स्तनधारीयों की वृद्ध RBC में इनकी संख्या कम होती है।
  • माइक्रेस्टेरिय्स हरित शैवाल (Micrasterias green algae) और स्पोरोज़ोइट (sporozoite) की कोशिका में एक माइटोकॉन्ड्रिया होता है।
  • काओस काओस अमीबा (Chaos Chaos amoeba) और प्लेमीक्सा (pleomyxa) में 5 लाख माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं।
  • जन्तुकोशिकाओं में पादप कोशिकाओं की तुलना में अधिक माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना (Structure of Mitochondria)

  • आमतौर पर यह सॉसेज के आकार का या बेलनाकार, तंतुमय या छड़जैसा होता है
  • इसका व्यास 0.2-1.0µm और लंबाई 1.0-4.1µm होती है।

माइटोकॉन्ड्रिया एक दोहरी झिल्ली आबंध संरचना है, जिसमें निम्न घटक होते हैं-

बाहरी झिल्ली (Outer membrane)

  • माइटोकॉन्ड्रिया की बाहरी झिल्ली प्रोटीन और फॉस्फोलिपिड की बनी होती है इसमें फॉस्फेटिडिल कोलीन की मात्रा अधिक होती है। इसकी मोटाई 60-70 Å होती है।
  • इसकी बाहरी झिल्ली द्वारा बहुत बड़े अणुओं (6000 kD) का स्थानांतरण हो सकता है।
  • इसमें बड़ी संख्या में धंसे हुए प्रोटीन (integral proteins) होते हैं जिन्हें पोरिन (porins) कहा जाता है।

बाहरी झिल्ली की सतह पर वृंतविहीन कण पाये जाते है, जिनसे पार्सन की उपइकाई (subunits of parson) कहा जाता है।

भीतरी झिल्ली (Inner membrane)

यह माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली है जिस पर ऑक्सीडेटिव फॉस्फोराइलेशन के एंजाइम पाए जाते है इस झिल्ली पर एटीपी संश्लेषण की प्रक्रिया होती है।

भीतरी झिल्ली (Inner membrane) की बाहरी सतह को सी-फेस (C-Face) तथा आंतरिक सतह को एम-फेस (M – Face) कहा जाता है।

क्रिस्टी (Cristae)

आंतरिक झिल्ली में कई उभार (projection) होते हैं जिन्हें क्रिस्टी (Cristae) कहा जाता है।

क्रिस्टी में टेनिस के रेकेट के समान संरचना होती हैं। जिन्हें F2 कण या ऑक्सीसोम या आंतरिक झिल्लिका उपइकाई (inner membrane subunit) कहा जाता है। ऑक्सीसोम एटीपीस एंजाइम होते हैं जो ऑक्सीडेटिव फास्फोरिलीकरण में भाग लेता हैं।

ऑक्सीसोम का निर्माण दो कारकों F0 तथा F1 के द्वारा होता है। F0 कण ऑक्सीसोम के आधार पर होता है। जो आंतरिक झिल्ली के साथ F1 कण के जुड़ने में मदद करता है और F0 F1 कण  को OSCP (oligomycin sensitivity conferring protein) कहा जाता है। दो ऑक्सीसम के बीच की दूरी 100Å होती  है।

आधात्री (Matrix)

  • आंतरिक झिल्ली से घिरे हुए स्थान में भरे द्रव को मैट्रिक्स के रूप में जाना जाता है।
  • इसमें कुल माइटोकॉन्ड्रियन प्रोटीन का लगभग 2/3 भाग होता है। ये प्रोटीन में क्रेब्स चक्र एंजाइम, श्वसनकारी एंजाइम होते है।
  • विशेष माइटोकॉन्ड्रियल राइबोसोम, टी-आरएनए और माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए जीनोम की कई प्रतियां शामिल हैं।

माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (Mitochondrial DNA)

  • माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग (semi-autonomous orgenelle) कहा जाता है क्योंकि उनमें माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mt-DNA) उपस्थिति होता है। जिसके कारण यह अपने प्रोटीन एवं एंजाइमों का निर्माण स्वंय कर सकता है।
  • Mitochondrial DNA द्विरज्जुकी (double stranded), नग्न (naked) दानेदार (granular), गोलाकार (circular), उच्च G-C अनुपात (higher G-C ratio) वाला अणु है। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mt-DNA) कोशिक के कुल डीएनए का 1% भाग होता है।
  • माइटोकॉन्ड्रिया में जीनोम (mt-DNA) का आकार छोटा होता है। लेकिन जीन की संख्या बहुत अधिक होती है।
  • mt-DNA का आकार जानवरों की तुलना में पौधे में अधिक होता है।
  • mt-DNA में उत्परिवर्तन से लेबर ऑप्टिक न्यूरोपैथी (Labour Optic Neuropathy) विकार उत्पन्न होता है। जिसमें नेत्र की दृक तंत्रिका (Optic Nerve) से जुड़े न्यूरॉन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
  • mt-डीएनए का उपयोग Phylogenetic संबंधों के अध्ययन के लिए किया जाता है।

माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य

इसमें कोशिकीय श्वसन (Cellular respiration) होता है।

इसमें एटीपी का संश्लेषण (ATP production), एटीपी का भंडारण (ATP storage) और परिवहन (transport) होता है। ये तीनों कार्य माइटोकॉन्ड्रिया में होने के कारण इसको कोशिका का शक्ति गृह  (Power house of the cell) कहा जाता है।

न्यूरॉन्स में पाए जाने वाले माइटोकॉन्ड्रिया न्यूरोहोर्मोन के निर्माण में मदद करते हैं।

विटललोजेनेसिस (Vitellogenesis) के दौरान माइटोकॉन्ड्रिया में mitochondrial kinase एंजाइम पीतक (Yolk) को घना और अघुलनशील बनाता है।