अम्ल

अम्ल वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं तथा नीले लिटमस को लाल कर देते हैं उन्हें अम्ल कहा जाता हैं। इन पदार्थों को जब जल में घोला जाता है तो यह वियोजित होकर हाइड्रोजन आयन देते हैं।
वे अम्ल जो जीवित स्रोतों से प्राप्त होते हैं उन्हें कार्बनिक अम्ल कहा जाता हैं जैसे – एसिटिक अम्ल ,सिट्रिक अम्ल, मौलिक अम्ल आदि। तथा वे अम्ल जो अजीवित स्रोतों से प्राप्त होते हैं उन्हें खनिज अम्ल कहा जाता हैं जैसे – हाइड्रो क्लोरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल ,सल्फ्यूरिक अम्ल आदि।

अम्ल के प्रकार

अम्लों को चार भागों में बांटा गया हैं-

प्रबल अम्ल (Strong acids) – वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप में आयनित होते है। उन्हें प्रबल अम्ल कहते है। उदाहरण – HCL

दुर्बल अम्ल (Weak acids) – वे अम्ल जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते है। उन्हें दुर्बल अम्ल कहा जाता है। उदाहरण – एसिटिक अम्ल , फार्मिक अम्ल , कार्बोनिक अम्ल आदि।

हाइड्रो अम्ल (Hydroacids) – वो अम्ल जिनमे ऑक्सीजन नहीं पाया जाता है। लेकिन इसके आलावा हाइड्रोजन के साथ अन्य अधात्विक तत्व होते हैं, उन्हें हाइड्रो अम्ल कहा जाता हैं। उदाहरण – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCL), हाइड्रोफलुओरिक अम्ल (HF), हाइड्रोब्रोमिक अम्ल (HBr) आदि।

ऑक्सी अम्ल (oxiacids) – वो अम्ल जिनमे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ साथ दूसरे तत्व भी मौजूद होते है, उन्हें ऑक्सी अम्ल कहते है। उदाहरण – सल्फ्यूरिक अम्ल, फास्फोरस क्लोरस अम्ल, नाइट्रिक अम्ल।

अम्ल के गुण

  • अम्लों की संक्षारक प्रकृति होती हैं।
  • अम्ल का स्वाद खट्टा होता है।
  • अम्ल क्षारकों के साथ क्रिया करके लवण और जल का निर्माण करते है।
  • अम्ल विद्युत के सुचालक होते हैं।
  • अम्लीय अधिक सक्रिय धातुओं के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन को मुक्त करते हैं।
  • अम्ल, धातु कार्बोनेट तथा धातु बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस मुक्त करते हैं।
  • अम्ल जल में विलय होते हैं। जब किसी अम्ल को जल में घोला जाता है तो उसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा विलियन का ताप बढ़ जाता है।उत्पन ऊष्मा की मात्रा अम्ल की प्रकृति पर निर्भर करती है। प्रबल अम्लों को जल में घुलने पर अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। अतः प्रबल अम्ल को तनु करने के लिए उनमे कभी भी जल नहीं मिलाते हैं।

अम्लीय वर्षा

साधारण वर्ष में जल में वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड घुलने के कारण इसकी pH का मान सामान्यतः 5.6 होता है। जो वर्षा के जल में H+ आयन मुक्त करता है। जब अन्य अम्लों की उपस्थिति के कारण वर्षा जल का pH मान 5 से कम हो जाता हैं। तो ऐसी वर्षा को अम्ल वर्षा कहा जाता हैं। जब वातावरणीय वायु में सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड जैसे – नाइट्रस आक्साइड या नाइट्रिक ऑक्साइड वर्षा के जल में घुल जाते है।

अम्ल वर्षा में मृदा की अम्लता में वृद्धि हो जाती है। जिससे पादप व जंतु जगत को नुक्सान होता है। अम्ल वर्षा में त्वचा रोग दमा आज की संभावना रहती है। मृदा व पानी के अम्लीय होने से उपज पर वहां के जीव-जंतुओं तथा वनस्पतियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

अम्ल का उपयोग

अम्ल उपयोग
सल्फ़्यूरिक अम्ल (H2SO4) बैटरी बनाने में (लेड एसिड बैटरी)
पेट्रोलियम तथा खनिज तेल के परिष्कार में
उर्वरक उद्योग में, जैसे सुपरफास्फेट, अमोनियम सल्फेट आदि के निर्माण में 
धातुओं पर जस्ता चढ़ाना तथा धातुकर्म उद्योगों में
विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में
कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करने में
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) अनेक पदार्थों, जैसे सरेस, जिलेटिन, अस्थिकोयला, रंजकों के माध्यम, कार्बनिक यौगिकों अदि के निर्माण में
पेट्रोलियम कूपों के उपचार, बिनौले से कर्पासिका निकालने और रोगाणुनाशी के रूप में
भोजन में उपस्थित हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में
क्लोरीन, अमोनिया क्लोराइड, ग्लूकोस के निर्माण में
नाइट्रिक अम्ल (HNO3) उर्वरक का निर्माण करने में
विस्फोटक पदार्थ, दवाइयों के बनाने में, रंजकों में
लवणों के निर्माण में
अम्लराज (HNO3+3 HCl) या ‘ऐक्वारेजिया’ (Aqua regia) के निर्माण में
स्टेनलेस स्टील के अम्लोपचार, धातु के निक्षारण में और राकेट ईंधनों में ऑक्सीकारको के रूप में 
एसिटिक अम्ल (CH3COOH) इत्र, प्लास्टिक, शीतल पेय की बोतलों (पोलिइथाइलीन टेरिफ्थेलेट) के निर्माण में
कीटनाशकों के निर्माण में
सिन्थेटिक फाइबर और कपड़े बनाने में
एंटीसेप्टिक (Antiseptic), बैक्टीरिया रोधी और फंगस रोधी दवाओं के निर्माण में
फोटोग्राफिक फिल्म के लिए सेलूलोज़ एसिटेट के रूप में
ध्रुवीय विलायक के रूप में
चिकित्सकीय रूप से, एसिटिक एसिड का उपयोग कैंसर के इलाज के दौरान ट्यूमर में सीधे इंजेक्शन के रूप में किया जाता है।
सिट्रिक अम्ल (C6H8O7) भोजन एवं मृदु पेयों में खट्टापन लाने के लिये
जल को मृदु करने के लिये
प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में 
टार्टरिक अम्ल (C4H6O6) भोजन में एंटीऑक्सिडेंट और लीवनिंग एजेंट के रूप में
वाइन बनाने की प्रक्रिया में
लैक्टिक अम्ल (C3H6O3) खाद्य परिरक्षक, इलाज एजेंट और स्वाद बढ़ाने वाले एजेंट के रूप में
भोजन और फार्मास्यूटिकल्स में 
मस्तिष्क की चोटों के उपचार में