नाभिक (Nucleus)

परमाणु के बीच में उपस्थित धनात्मक वैद्युत आवेश युक्त एक ठोस भाग उपस्थित है। नाभिक, नाभिकीय कणों प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से बने होते है। इस कण को नूक्लियान्स कहा जाता है। प्रोटॉन व न्यूट्रॉन दोनो का द्रव्यमान लगभग समान ही होता है और दोनों का आंतरिक कोणीय संवेग (स्पिन) 1/2 होता है। प्रोटॉन इकाई विद्युत आवेशयुक्त होता है जबकि न्यूट्रॉन अनावेशित प्रकार का होता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनो को न्यूक्लिऑन कहते है। नाभिक का व्यास (10−15 मीटर) (हाइड्रोजन-नाभिक) से (10−14 मीटर) (युरेनियम) के दायरे में होता है। परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक के वजह से ही ही होता है, इलेक्ट्रान का योगदान लगभग नगण्य होता है।

नाभिक की खोज – नाभिक की खोज अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने 1911 में किया था

नाभिक का आकार-

नाभिक में प्रोटॉनो के बांटने से नाभिक का औसत व्यास निर्धारित होता है जो कि 1−10 से 10−15 मीटर सीमा के अंदर होता है।

नाभिक का व्यास परमाणु के व्यास 10−10 मीटर की तुलना में अत्यधिक कम होता है, इस कारण परमाणु के अंदर नाभिक बहुत ही कम आयतन को घेरता है।

नाभिक की आकृति-

कुछ नाभिक गोल आकृति के होते है जबकि कुछ की आकृति थोडी दबी हुई तथा विकृत होती है।

नाभिक बंधन ऊर्जा-

किसी नाभिक के प्रोटॉन, न्यूट्रॉन को अलग करने के लिए जरूरी उर्जा को उस नाभिक की बंधन ऊर्जा कहा जाता हैं। बंधन ऊर्जा वो ऊर्जा होती है जो नाभिक को बांधकर रखती है। इस ऊर्जा का स्तर अलग-अलग नभिकों में अलग-अलग होता है। नाभिक का द्रव्यमान जितना ज्यादा होगा उसका ऊर्जा स्तर भी उतना ही ज्यादा होगा। बंधन ऊर्जा की विविधता के कारण नाभिक गति में स्थिर नहीं होते है। नाभिक की प्रकृति अस्थिरता से स्थिरता की ओर जाने की होती है। अतः अस्थिर नाभिक क्षय के बाद स्थिर नाभिक में बदलते होते है। नाभिक के क्षय होने की दर उसकी औसत आयु पर निर्भर करती है।

नाभिक का कोणीय संवेग या स्पिन-

नाभिक, बोसॉन और फर्मिऑन दोनो तरह के पाए जाते है। जिन नाभिकों में न्यूक्लिऑन की संख्या सम संख्या होती है, बोसॉन कहलाते हैं और जिनमें संख्या विषम होती है वो फर्मिऑन कहलाते हैं।

नाभिकीय विखंडन-

ऐसी प्रक्रिया जिसके अंदर एक भारी नाभिक दो लगभग बराबर नाभिकों में खंडित हो जाता हैं उसे विखण्डन (fission) कहा जाता हैं। इसी अभिक्रिया के आधार पर बहुत सारे परमाणु रिएक्टर या परमाणु भट्ठियों का निर्माण हुआ हैं जो विद्युत उर्जा का उत्पादन करतीं हैं।

नाभिकीय ऊर्जा –

परमाणु ऊर्जा वह ऊर्जा होती है जिसे नियंत्रित (यानी, गैर-विस्फोटक) नाभिकीय अभिक्रिया से उत्पन्न किया जाता है। वर्तमान में विद्युत को उत्पादित करने के लिए वाणिज्यिक संयंत्र नाभिकीय विखण्डन का प्रयोग करते हैं। नाभिकीय रिएक्टर के द्वारा प्राप्त उष्मा पानी को गर्म करके भाप बनाने के काम आती है, जिसे फिर बिजलीका उत्पादन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।