योगिक

दो या दो से अधिक तत्व या पदार्थ जब एक निश्चित भार के अनुपात में रासायनिक क्रिया करके या रासायनिक बन्धो द्वारा जुड़कर एक नए पदार्थ का निर्माण करते है तो इस प्रकार निर्मित इस नए पदार्थ को यौगिक कहा जाता है। उदाहरण : गंधक का अम्ल , साधारण नमक आदि यौगिक के उदाहरण है।

जब भिन्न तत्त्वों के दो या दो से अधिक परमाणु एक निश्चित अनुपात में संयोजित होते हैं , तब रासायनिक यौगिक का एक अणु प्राप्त होता है । किसी रासायनिक यौगिक के घटकों को भौतिक विधियों द्वारा सरल पदार्थों में पृथक् नहीं किया जा सकता है । उन्हें पृथक् करने के लिए रासायनिक विधियों का प्रयोग करना पड़ता है। जल, अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड, चीनी आदि यौगिकों के कुछ उदाहरण हैं।

यौगिकों को दो भागो में विभाजित किया जा सकता है –

  1. कार्बनिक योगिक
  2. अकार्बनिक योगिक

कार्बनिक योगिक –

कार्बन के रासायनिक यौगिकों को कार्बनिक यौगिक (organic compounds) कहा जाता हैं। प्रकृति में इनकी कुल संख्या 10 लाख से भी ज्यादा है। जीवन पद्धति में कार्बनिक यौगिकों की अहम् भूमिका है। इनमें हाइड्रोजन भी पाया जाता है। ऐतिहासिक तथा परम्परागत कारणों से कार्बन के कुछ यौगिकों को कार्बनिक यौगिकों की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। इनमें कार्बनडाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसे प्रमुख हैं। सभी जैव अणु जैसे कार्बोहाइड्रेट, अमीनो अम्ल, प्रोटीन, आरएनए तथा डीएनए एक कार्बनिक यौगिक ही हैं।

कार्बनिक यौगिकों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है-

1. ऐलीफैटिक या खुली श्रृंखला वाले यौगिक (Aliphatic or Open Chain Compounds) –

ऐलिफैटिक शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के ऐलिफॉस (Aliphos) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ वसा (Fat) होता है। मिथेन को सभी ऐलिफैटिक यौगिकों का जन्मदाता माना जाता है।

वो कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन के सभी परमाणु एक खुली श्रृंखला में सम्बद्ध होते हैं, उन्हें ऐलिफैटिक यौगिक कहा जाता हैं। इनमें कार्बन परमाणु सीधी या शाखित श्रृंखलाओं (Straight or Branched chains) में जुड़े रह सकते हैं। उदाहरण के लिए –

– नॉर्मल ब्यूटेन या नॉर्मल पेन्टेन सीधी या सरल श्रृंखला वाले यौगिक है- नॉर्मल ब्यूटेन, नॉर्मल पेन्टेन।

– आइसो ब्यूटेन, आइसो पेन्टेन एवं नियो (Neo) पेन्टेन शाखित श्रृंखला वाले यौगिक हैं- आइसो ब्यूटेन, आइसो पेन्टेन एवं नियो पेन्टेन।

2. बंद श्रृंखला वाले चक्रीय यौगिक (closed Chain or Cyclic Compounds) –

वे यौगिक, जिनमें कार्बन परस्पर संयुक्त होकर एक बन्द श्रृंखला या चक्र का निर्माण करते हैं, बन्द श्रृंखला वाले या चक्रीय यौगिक कहलाते है। श्रृंखला की रचना के आधार पर चक्रीय यौगिकों को पुनः दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है-

कार्बन-चक्रीय या सम-चक्रीय यौगिक (Carbocyclic or Homoyclic Compounds)

वे चक्रीय यौगिक जिनका निर्माण केवल कार्बन-परमाणुओं के संयोग से होता है। कार्बन चक्रीय या सम चक्रीय यौगिक कहलाते हैं। कार्बन-चक्रीय यौगिक पुनः दो वर्गों में बाँटे जाते हैं –

ऐरोमैटिक यौगिक (Aromatic Compounds):- इस वर्ग के यौगिकों की बन्द श्रृंखला का निर्माण कार्बन के छह परमाणुओं से होता है। जिस प्रकार मिथेन को सभी ऐलिफैटिक यौगिकों का जन्मदाता कहा जाता है, उसी प्रकार बेंजीन को सभी ऐरोमैटिक यौगिकों का जन्मदाता मानते हैं। ऐरोमैटिक शब्द ऐरोमा (Aroma) से बना है जिसका अर्थ सुगन्ध होता है। बेंजीन, फिनॉल, ऐनिलीन आदि ऐरोमैटिक यौगिक हैं।

– ऐलिसाइक्ल्कि यौगिक (Alicyclic Compounds): – कुछ चक्रीय यौगिकों के गुण बंद श्रृंखला होने पर भी ऐरोमैटिक यौगिकों की तुलना में ऐलिफैटिक यौगिकों से ज्यादा मिलते-जुलते हैं। इसी कारण इन्हें ऐलि (ऐलिफैटिक से) + साइक्लिक (चक्रीय) = ऐलिसाइक्ल्कि यौगिक कहते हैं। इनमें ऐरोमैटिक यौगिकों की तुलना में हाइड्रोजन परमाणु ज्यादा होते हैं। इनमें ऐरोमैटिक यौगिकों की भाँति चक्र में एकान्तर (Alternate) से एक-बन्धन और द्वि-बन्धन नहीं होते हैं। साइक्लोब्यूटेन, साइक्लोपेन्टेन, साइक्लोहेक्सेन आदि ऐलिसाइक्लिक यौगिक हैं।

विषम चक्रीय यौगिक (Heterocyclic Compounds):

वे चक्रीय यौगिक जिनकी बन्द श्रृंखला का निर्माण कार्बन के अलावा अन्य तत्वों के परमाणुओं द्वारा होता है, विषम चक्रीय यौगिक कहा जाता हैं। उदाहरण – पाइरौल, फ्यूरान, थायोफिन, पिरीडीन आदि विषम चक्रीय यौगिक हैं, जिनमें क्रमशः नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, गन्धक एवं नाइट्रोजन विषम परमाणु हैं।

अकार्बनिक योगिक –

प्रांगार को छोड़कर बाकि सभी तत्वों और उनके योगिकों की मीमांसा करना अकार्बनिक रसायन का क्षेत्र है। बोरॉन, सिलिकन, जर्मेनियम आदि तत्व भी लगभग उसी प्रकार के विविध यौगिक का निर्माण करते हैं, जैसे- कार्बन, पर इस पार्थिव सृष्टि में उनका उतना महत्व नहीं है जितना महत्व कार्बन यौगिकों का, इसलिए कार्बनिक रसायन का अन्य तत्वों से पृथक्‌ रासायनिक क्षेत्र मान लिया गया है। मनुष्य एवं वनस्पतियों का जीवन कार्बन यौगिकों के चक्र पर निर्भर करता है, अत: कार्बनिक यौगिकों को एक अलग उपांग में रखना कुछ अनुचित नहीं है। यह कार्बन ही है जो पृथ्वी पर पाए जाने वाले सामान्य ताप (0° से 40°) पर अनेक स्थायी समावयवी यौगिक प्रदान कर सकता है।

अधातु एवं धातु

अकार्बनिक यौगिकों में तत्वों में कुछ धातु हैं और कुछ अधातु है। अधातु तत्वों में कुछ मुख्य ये हैं :-

गैस – हाइड्रोजन, हीलियम, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फ्लुओरीन निऑन, क्लोरीन, आर्गन, क्रिप्टॉन, तथा ज़ीनॉन।

ठोस – बोरॉन, कार्बन, सिलिकन, फास्फोरस, गंधक, जर्मेनियम, आर्सेनिक, मोलिब्डेनम, टेल्यूरियम तथा आयोडीन।

द्रव – ब्रोमीन।

धातुओं में केवल पारद ऐसा है जो साधारण ताप पर द्रव है। प्राचीन ज्ञात धातुएँ जैसा सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, वंग या राँगा, सीसा, जस्ता और पारा आदि हैं। लगभग प्रत्येक सभ्य देशों का इन धातुओं से पुराना परिचय है। सोना और चाँदी स्वतंत्र रूप में प्रकृति में उपस्थित होते हैं। शेष धातुएँ प्रकृति में सल्फाइड, सल्फेट, या ऑक्साइड के रूप में पायी जाती हैं। इनसे शुद्ध धातुएँ प्राप्त करना आसान था। धातुओं के उन यौगिकों को जिनमें से धातुएँ आसानी से अलग की जा सकती थीं। इन अयस्कों को बहुधा कोयले के साथ तपा लेने पर ही धातु शुद्ध रूप में मुक्त हो जाती है।

माइकल फैराडे और डेवी के समय से विद्युत्धारा का प्रयोग बढ़ा और जैसे-जैसे डायनेमो की बिजली अधिक सस्ती प्राप्त होने लगी, उसका उपयोग विद्युद्विश्लेषण में वृद्धि होने लगी। उसकी सहायता से लवणों में से (उनके विलयनों के विद्युद्विश्लेषण से अथवा ऊँचे ताप पर गलित लवणों के विद्युद्विश्लेषण से) अनेक धातुएँ अलग की जा सकीं। ताँबे का एक यौगिक तूतिया (कॉपर सल्फेट) है। पानी में बने इसे विलयन में से विद्युत्‌ धारा द्वारा ताँबा अलग किया जा सकता है। विद्युत्धारा के प्रयोग से मैग्नीशियम, सोडियम, लिथियम, पोटैशियम, कैल्सियम, बेरियम आदि धातुएँ, उनके लवण को गलाकर,अलग की गई।

अकार्बनिक रसायन के प्रारंभिक युग में धातुओं के जिन यौगिकों को बनाने का विशेष प्रयास किया जाता था, वे ये थे : ऑक्साइड, हाइड्रॉक्साइड, फ्लुओराइड, क्लोराइड, ब्रोमाइड, आयोडाइड, सल्फाइड, सल्फाइट, सल्फेट, थायोसल्फेट, ऐसीटेट, ऑक्सलेट, नाइट्राइड, नाइट्रेट, सावनाइड, कार्बाइड, कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, फॉस्फेट, आर्सिनेट, टंगस्टन, मालिब्डेट, यूरेनेट। इन यौगिकों का तैयार करना साधारणतया आसान है। ऑक्साइड या कार्बोनेटों पर उपयुक्त अम्लों की अभिक्रिया से वे बनाए जा सकते हैं। विलेय लवणों के विलयनों में ऋण आयन (ऐनायन) मिलाकर इनमें से कुछ के अवक्षेप लाए जा सकते हैं, यदि ये अवक्षेप्य लवण पानी में अविलेय हों।

मिश्रण एवं योगिक में अंतर –

मिश्रण योगिक
मिश्रण में दो या ज्यादा प्रकार के अणु हो सकते है।
यौगिक मे एक ही प्रकार के अणु होते है।
मिश्रण में इसके अवयवी पदार्थो के सभी गुणधर्म मौजूद होते है।
यौगिक के गुणधर्म इसके अवयवी पदार्थों से भिन्न-भिन्न होते है।
मिश्रण के बनते समय ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश के रूप में) न तो शोषित होती है, और न मुक्त हाती है।
यौगिक के बनते समय प्रायः ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश इत्यादि के रूप में)
या तो शोषित होती है, या मुक्त होती है।

मिश्रण का संघटन अनिश्चित होता है। इसके अवयव द्रव्यमान
से किसी भी अनुपात में हो सकते है।
यौगिक का संघटन निश्चित होता है। यौगिक से इसके अवयव द्रव्यमान
के एक निश्चित अनुपात में होते है।

मिश्रण का गलनांक, क्वथनांक, घनत्व निर्धारित नहीं होता है।
यौगिक का गलनांक, क्वथनांक एवं घनत्व निर्धारित होता है।
विलयन (जो कि समांग होता है) को छोड़कर मिश्रण प्रायः विषमांग होते है।
यौगिक समांग होते है।
मिश्रण से इसके अवयवी पदार्थो को भौतिक विधियों जैसे-
छानना, वाष्पन, ऊर्ध्वपातन आदि क्रियाओ द्वारा अलग किया जा सकता है।
यौगिक से इसके अवयवों को भौतिक विधियों द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।

मिश्रण का कोई निश्चित रासायनिक सूत्र नहीं होता है।
यौगिक का एक निश्चित रासायनिक सूत्र होता है।

मिश्रण का घनत्व, अवयवी पदार्थो के घनत्वों का औसत होता है।
यौगिक का घनत्व अवयवी पदार्थों के घनत्व से अलग होता है, साथ ही यह अवयवी पदार्थों के घनत्व का औसत नहीं होता है।