परमाणु की संरचना

परमाणु (Atom) में नाभिक, इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और न्यूट्रॉन पाये जाते है। इनमें से प्रोटोन पर पॉजिटिव आवेश होता है तथा इलेक्ट्रॉन पर नेगेटिव आवेश होता है। और न्यूट्रॉन आवेश रहित होता है (इसके कोई आवेश नहीं होता है )। प्रोटोन और न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में पाये जाते है। प्रोटोन और इलेक्ट्रॉन की संख्या परमाणु में बराबर ही होती है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों तरफ चक्कर लगाते है।

परमाणु की संरचना निम्न भागो से मिलकर बनती है –

  • नाभिक (Nucleus)
  • इलेक्ट्रॉन (Electron)
  • प्रोटोन (Proton)
  • न्यूट्रॉन (Neutron)

नाभिक (Nucleus)-

नाभिक, परमाणु के बीच में उपस्थित धनात्मक वैद्युत आवेश वाला एक ठोस क्षेत्र होता है। नाभिक का निर्माण, नाभिकीय कणों प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के द्वारा होता है। इस कण को नूक्लियान्स कहा जाता है। प्रोटॉन व न्यूट्रॉन दोनो का द्रव्यमान लगभग समान ही होता है और दोनों का आंतरिक कोणीय संवेग (स्पिन) 1/2 होता है। प्रोटॉन इकाई विद्युत आवेशयुक्त होता है जबकि न्यूट्रॉन अनावेशित प्रकार का होता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनो को न्यूक्लिऑन कहते है। नाभिक का व्यास (10−15 मीटर) (हाइड्रोजन-नाभिक) से (10−14 मीटर) (युरेनियम) के दायरे में होता है। परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक के वजह से ही ही होता है, इलेक्ट्रान का योगदान लगभग नगण्य होता है।

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इलेक्ट्रॉन (Electron)-

इलेक्ट्रॉन या विद्युदणु ऋणात्मक वैद्युत आवेश युक्त मूलभूत उपपरमाणविक कण होता है। यह परमाणु में नाभिक के चारो तरफ घूमता रहता हैं। इसका द्रव्यमान सबसे छोटे परमाणु (हाइड्रोजन) से भी हजारगुना कम ही होता है। परम्परागत रूप से इसके आवेश को ऋणात्मक माना जाता है और इसका मान1 परमाणु इकाई (e) निर्धारित किया गया है। इस पर -1.6E-19 कूलाम्ब परिमाण का ऋण आवेश होता है। इसका द्रव्यमान 9.11E−31 किग्रा होता है जो प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग 1837 वां भाग है।

किसी उदासीन परमाणु में विद्युद अणुओं और प्रोटानों की संख्या एक समान ही होती है। इनकी आंतरिक संरचना का कोई पता नहीं है इसलिए इसे प्राय: मुख्य कण कहा जाता है। इनकी आंतरिक प्रचक्रण 1/2 होती है, अतः यह फर्मीय होते हैं। इलेक्ट्रॉन के प्रतिकण को पोजीट्रॉन कहा जाता है। द्रव्यमान के अलावा पोजीट्रॉन के सारे गुण जैसे – आवेश इत्यादि इलेक्ट्रॉन के ठीक उल्टे होते हैं। जब इलेक्ट्रॉन और पोजीट्रॉन की भिड़ंत होती है तो दोंनो पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं एवं दो फोटॉन का निर्माण होता है।

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प्रोटोन (Proton)

प्राणु (प्रोटॉन) एक धनात्मक विद्युत आवेशयुक्त कण होते है, जो परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन के साथ उपस्थित होता हैं। इसे p प्रतिक चिन्ह द्वारा दिखाया जाता है। इस पर 1.602E−19 कूलाम्ब का धनावेश होता है। इसका द्रव्यमान 1.6726E−27 किग्रा होता है जो इलेक्ट्रॉन के द्रब्यमान के लगभग 1845 गुना है। प्राणु तीन प्राथमिक कणो दो अप-क्वार्क और एक डाउन-क्वार्क के द्वारा बना होता है। स्वतंत्र रूप से यह उदजन आयन H+ के रूप में पाया जाता है। प्रोटोन फर्मिऑन होते है, जिनकी प्रचक्रण 1/2 होती है और यह तीन क्वार्क से मिलकर बने होते है अर्थात यह बेर्यॉन (हेड्रॉन का एक प्रकार) के रूप में होते है।

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न्यूट्रॉन (Neutron)

न्यूट्रॉन एक उपपरमाण्विक कण होते है जो प्रत्येक पदार्थों के परमाणु के नाभिक में उपस्थित होता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन मिलकर परमाणु के नाभिक का निर्माण करते हैं। न्यूट्रॉन एक विद्युत उदासीन कण होता है जिसका द्रव्यमान 1.67493 × 10−27 kg होता है, जो कि इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से 1,839 गुना ज्यादा है। न्यूट्रॉन पूर्ण रूप से एक मूलभूत कण नही है बल्कि यह और भी छोटे अस्थाई सूक्ष्म कणों से मिलकर बना रहता है जिन्हे क्वॉर्क कहते हैं। न्यूट्रॉन तीन क्वॉर्क से मिलकर बना होता है, जिसमे दो डाउन क्वॉर्क होते हैं तथा एक अप क्वॉर्क होता हैं।

न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में तो स्थाई रूप से उपस्थित होता है किन्तु स्वच्छ रूप से अपने आप में यह स्थाई कण नहीं है। जब न्यूट्रॉन नाभिक में मौजूद ना होकर खुले में उपस्थित होता है तब इसका रेडियोएक्टिव क्षय होना शुरू हो जाता है। न्यूट्रॉन रेडियोएक्टिव क्षय के परिणामस्वरूप एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो में टूट जाता है। न्यूट्रॉन के रेडियोएक्टिव क्षय की अर्ध आयु 614 सेकंड होती है।

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