कांग्रेस की नीतियों का विरोध

लोहिया का ‘काँग्रेस हटाओ’ आन्दोलन

राम मनोहर लोहिया लोगों को आगाह करते आ रहे थे कि देश की हालत को सुधारने में काँग्रेस नाकाम रही है। काँग्रेस शासन नए समाज की रचना में सबसे बड़ा काँटा है। उसका सत्ता में बने रहना देश के लिये अच्छा नहीं है।

इसलिए लोहिया ने नारा दिया – “काँग्रेस हटाओ, देश बचाओ।

1967 के आम चुनाव में एक बड़ा परिवर्तन हुआ। देश के 9 राज्यों – पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में गैर काँग्रेसी सरकारें गठित हो गई। लोहिया इस परिवर्तन के प्रणेता और सूत्रधार बने।

जेपी आन्दोलन

सन् 1974 में जयप्रकाश नारायण ने इन्दिरा गान्धी की सत्ता को हटाने के लिये संपूर्ण क्रांति का नारा दिया। आन्दोलन को जनता का भारी समर्थन मिला। इससे निपटने के लिये इन्दिरा गान्धी ने देश में इमरजेंसी लगा दी। विरोधी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इसका आम जनता ने जमकर विरोध किया। जनता पार्टी की स्थापना हुई और सन् 1977 में काँग्रेस पार्टी बुरी तरह हारी।

पुराने काँग्रेसी नेता मोरारजी देसाई  के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी किन्तु चौधरी चरण सिंह की महत्वाकांक्षा के कारण वह सरकार अधिक दिनों तक न चल सकी।

भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन

सन् 1987 में यह बात सामने आयी थी कि स्वीडन की हथियार कम्पनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिये 80 लाख डालर की दलाली चुकायी थी। उस समय केन्द्र में काँग्रेस की सरकार थी और उसके प्रधानमन्त्री पद पर राजीव गान्धी थे।

स्वीडन रेडियो ने सबसे पहले 1987 में इसका खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स काण्ड कहते हैं। इस खुलासे के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन चलाया जिसके परिणाम स्वरूप विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधान मन्त्री बने।

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