अहमदशाह (1748-54 ई.)

  • जन्म – 1725
  • शासनकाल – 1748 से 1754 ई. 
  • मृत्यु – 1775
  • इसके शासन काल में प्रशासन का काम काज हिजड़ों और औरतों के एक गिरोह के हाथों में आ गया, जिसकी मुखिया राजमाता उधमबाई (उपाधि-किबला-ए-आलम) थी।
  • उसने हिजड़ों के सरदार जाबेद खाँ को ‘नवाब बहादुर’ की उपाधि प्रदान की।
  • उसे बुरहान-उल-मुल्क के दामाद एवं अवध के सूबेदार ‘सफदरजंग’ को अपना बजीर तथा कमरुद्दीन के लड़के मुइन-उल-मुल्क को पंजाब का सूबेदार बनाया।
  • इसके काल में अब्दाली ने भारत पर कुल पाँच बार आक्रमण किए।
  • वह अपने दूसरे तथा तीसरे आक्रमण में पंजाब तथा मुल्तान को जीतने में सफल रहा।
  • वजीर सफदरजंग के अवध में स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर लेने के बाद निजामुलमुल्क के पुत्र गाजीउद्दीन फिरोज जंग की स्थिति मजबूत हो गई. .उसने मुगल दरबार में बजीर का पद प्राप्त कर लिया तथा उचित अवसर पाकर बादशाह अहमदशाह को अपदस्थ कर उसकी आँखें निकलवाकर सलीमगढ़ की जेल में डाल दिया।
  • अब गाजीउद्दीन ने जहाँदारशाह के पुत्र आलमगीर द्वितीय को दिल्ली के सिंहासन पर बिठाया।

अयोग्य शासक

अहमदशाह के समय उसका प्रिय (हिजड़ा) ‘जावेद ख़ाँ दरबारी दल का नेता था। उसे ‘नवाब बहादुर’ की उपाधि प्रदान की गयी थी। प्रशासनिक कार्यों में राजमाता का पूरा हस्तक्षेप था। उसे ‘विला-ए-आलम’ की उपाधि प्राप्त थी। अहमदशाह एक अयोग्य और अय्याश बादशाह था, तथा उसमें प्रशासनिक क्षमता बिल्कुल नहीं थी। उसने प्रशासन के क्षेत्र में एक मूर्खतापूर्ण कार्य करते हुए अपने ढाई वर्ष के पुत्र मुहम्मद को पंजाब का गर्वनर नियुक्त किया और एक वर्ष के बेटे को उसका डिप्टी बना दिया। इसी प्रकार कश्मीर की गर्वनरी ‘सैय्यद शाह’ नामक एक बच्चे को सौंपी तथा 15 वर्ष के एक लड़के को उसका डिप्टी नियुक्त किया गया। ये नियुक्तयाँ उस समय की गयीं, जब अफ़ग़ान हमलों का ख़तरा बहुत अधिक था।