अहोम विद्रोह (1828-33 ई.)

  • समय -1828
  • नेतृत्व –  ‘गोमधर कुंअर’ 
  • कारण – असम के ‘कुली’ वर्ग के व्यक्तियों ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर बर्मा युद्ध के समय किये गये वायदे से मुकरने का आरोप लगाया

अहोम विद्रोह असम में हुआ था । इसका नेतृत्व गोमधर कुंवर एवं रूप चन्द्र कोनार ने किया। अहोम विद्रोह का कारण अहोम प्रदेश को अंग्रेजी राज्य में शामिल करना था। कंपनी ने शांतिपूर्ण नीति अपनायी एवं 1833 ई. में उत्तरी असम महाराज पुरन्दर सिंह को दे दिया।

अंग्रेज़ों के विरुद्ध अहोम विद्रोह 1828 ई. में किया गया था। असम के ‘कुली’ वर्ग के व्यक्तियों ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर बर्मा युद्ध के समय किये गये वादे से मुकरने का आरोप लगाया।

अंग्रेज़ों ने अहोम प्रदेश को अपने साम्राज्य में मिलाने का प्रयास किया। अहोमों ने अंग्रेज़ों के इस प्रयास को विफल करने के लिये 1828 ई. में ‘गोमधर कुंअर‘ के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया तथा रंगपुर पर चढ़ाई की योजना बनाई।

अंग्रेज़ी सेना इस विद्रोह पर नियंत्रण पाने में असफल रही। 1830 ई. में अहोमों द्वारा दूसरे विद्रोह की योजना बनाई गयी।

इससे पहले की विद्रोह होता, कम्पनी ने शान्ति की नीति अपनाते हुए उत्तरी असम के प्रदेश महाराज ‘पुरन्दर सिंह’ को दे दिये और विद्रोह शांत हो गया।