मुगलकालीन कला और साहित्य

मुगल चित्रकला का विकास:

  • बाबर के काल में मुगल चित्रकला
  • हुमायूँ काल में मुगल चित्रकला
  • अकबर के काल में मुगल चित्रकला
  • जहाँगीर काल में चित्रकला
  • शाहजहाँ के काल में चित्रकला
  • औरंगजेब कालीन चित्रकला

औरंगजेब कालीन चित्रकला

  • मुख्य लेख : औरंगज़ेब
  • औरंगज़ेब ने चित्रकारी को इस्लाम के विरुद्ध मानकर इससे घृणा की, पर अपने शासन काल के अन्तिम समय में उसने चित्रकारी में कुछ रुचि ली, जिसके परिणामस्वरूप उसके कुछ लघु चित्र शिकार खेलते हुए, दरबार लगाते हुए एवं युद्ध करते हुए बने।
  • मुग़ल शासन के इस दौर में चित्रकारी को मुग़ल दरबार में अपने जीविकापार्जन के लिए भी संघर्ष करना पड़ा।
  • अतः मुग़ल दरबार के चित्रकारों ने स्वतंत्र राज्यों में बसकर अपनी चित्रकारी को जीवित रखने प्रयास किया।
  • औरंगज़ेब ने अकबर के मक़बरे में बने चित्रों को चूने से पुतवा दिया था।

हुमायूँ काल में मुगल चित्रकला

  • हुमायूँ ने अफग़ानिस्तान के अपने निर्वासन के दौरान मुगल चित्रकला की शुरुआत की ।
  • फारस में ही हुमायूँ की मुलाकात मीर सैय्यद अली एवं ख्वाज़ा अब्दुस्समद से हुई जिन्होंने मुगल चित्रकला का आरम्भ किया।
  • मीर सैय्यद अली हेरात के प्रसिद्ध चित्रकार बिहजाद का शिष्य था।
  • मीर सैय्यद ने जो कृतियाँ तैयार की उसमें से कुछ जहाँगीर द्वारा तैयार की गई गुलशन चित्रावली में संकलित है।
  • हुमायूँ ने इन दोनों को दास्ताने-अमीर-हम्ज़ा (हम्ज़ानामा) की चित्रकारी का कार्य सौंपा।
  • हम्ज़ानामा मुगल चित्रशाला की प्रथम महत्त्वपूर्ण कृति है। यह पैगंबर के चाचा अमीर हम्ज़ा के वीरतापूर्ण कारनामों का चित्रणीय संग्रह है। इसमें कुल 1200 चित्रों का संग्रह है।
  • मुल्ला अलाउद्दीन कजवीनी ने अपने ग्रंथ ‘नफाई-सुल-मासिरे में हम्ज़ानामा को हुमायूँ के मस्तिष्क की उपज बताया।

अकबर के काल में मुगल चित्रकला

  • अकबर के समय के प्रमुख चित्रकार मीर सैय्यद अली, दसवंत, बसावन, ख्वाज़ा, अब्दुस्समद, मुकुंद आदि थे। आइने अकबरी में कुल 17 चित्रकारों का उल्लेख है।
  • अकबर के शासन काल में रज्मनामा नामक एक और पांडुलिपि तैयार की गयी। जिसमें दसवंत (एक कहार का बेटा) द्वारा बनाये गये चित्र मिलते हैं।इस विख्यात चित्रकार के चित्र रज्मनामा के अतिरिक्त अन्यत्र कहीं नहीं मिलते हैं।
  • अकबर ने दसवंत को अपने समय का प्रथम अग्रणी चित्रकार तथा उसकी कृति रज्मनामा को मुगल चित्रकला के इतिहास में मील का पत्थर कहा है।
  • अब्दुसस्मद के राजदरबारी पुत्र मुहम्मद शरीफ ने रज्मनामा के चित्रण कार्य का पर्यवेक्षण किया था।
  • अबुल फजल द्वारा उल्लिखित चित्रकारों में फारुख वेग को छोङकर अन्य सभी चित्रकारों ने इस महत्त्वपूर्ण पांडुलिपि को तैयार करने में सहयोग दिया था।
  • दसवंत बाद में मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया था और उसने 1584 ई. में आत्म हत्या कर ली थी।इसकी दो अन्यकृति मिलती हैं-खानदाने-तैमूरिया एवं तूतीनामा
  • बसावन अकबर के समय का सर्वोत्कृष्ट चित्रकार था क्योंकि वह चित्रकला के सभी क्षेत्रों – रेखांकन,रंगों के प्रयोग,छवि-चित्रकारी तथा भू-दृश्यों के चित्रण में सिद्धहस्त था।
  • बसावन की सर्वोत्कृष्ट कृति है-एक कृशकाय (दुबले-पतले) घोङे के साथ एक मजनूँ को निर्जन क्षेत्र में भटकता हुआ चित्र। रज्मनामा के अतिरिक्त प्रमुख चित्रित पांडुलिपि है-रामायण एवं अकबरनामा
  • अकबरनामा के चित्रों में यथार्थता एवं विश्वसनीयता कि जो स्वानुभूत भावना दृष्गोचर होती है वह अंयत्र कम ही मिलती है।इसके चित्रों में – पेङ – पौधे, वन्यजीवों और भू-दृश्यों का जीवंत चित्रण मिलता है।
  • अकबर के शासन काल में पहली बार भित्ति चित्रावली की शुरूआत हुई।

जहाँगीर काल में चित्रकला

मुगल सम्राट जहाँगीर के समय में चित्रकारी अपने चरमोत्कर्ष पर थी। उसने ‘हेरात’ के ‘आगारज़ा’ नेतृत्त्व में आगरा में एक ‘चित्रशाला’ की स्थापना की।

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शाहजहाँ के काल में चित्रकला

  • इस काल के चित्रों के विशेष विषयों में यवन सुंदरियाँ, रंग महल, विलासी जीवन और ईसाई धर्म शामिल हुए। स्याह कलम चित्र बने, जिन्हें कागज की फिटकरी और सरेस आदि के मिश्रण से तैयार किया जाता था। इनकी खासियत बारीकियों का चित्रण था जैसे- दाढ़ी का एक-एक बाल दिखाना, रंगों को हल्की घुलन के साथ लगाना।
  • शाहजहाँ के समय में आकृति-चित्रण और रंग सामंजस्य में कमी आयी । उसके काल में रेखांकन और बॉर्डर बनाने की उन्नति हुई।
  • शाहजहाँ को देवी प्रतीकों वाली अपनी तस्वीर बनाने का शौक था जैसे- उसके सिर के पीछे रोशनी का गोला।
  • प्रमुख चित्रकार:- अनूप, मीर हासिम, मुहम्मद फकीर उल्ला, हुनर मुहम्मद नादिर, चिंतामणि।
  • शाहजहाँ का एक विख्यात चित्र भारतीय संग्रहालय में उपलब्ध है, जिसमें शाहजहाँ को सूफी नृत्य करते हुए दिखाया गया है।
  • शाहजहाँ के जो भी चित्र बने उन सब में प्रायः उसे सर्वोत्तम वस्त्र और आभूषण धारण किए चित्रित किया गया।
  • इस दौर के एकल छवि चित्रों में यह विशेषता देखने में आती है कि गहराई और संपूर्ण दृश्य विधान प्रकट करने के लिये चित्रों की पृष्ठभूमि में दूर दिखाई देने वाला धुंधला नगर दृश्य हल्के रंगों में चित्रित किया गया।
  • गुलिस्ताँ तथा सादी का बुस्तान, दरबारियों के बीच ऊँचे आसन पर विराजमान शाहजहाँ, पिता जहाँगीर और दादा अकबर की संगति में शाहजहाँ, जिसमें अकबर ताज शाहजहाँ को सौंप रहा है आदि शाहजहाँ कालीन प्रमुख चित्र है।

मुगलकालीन चित्रकला

भारत में मुगल चित्रकला 16वीं और 18वीं शताब्दी के मध्य की अवधि का काल है। यह वह समय था जब मुगलों ने भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया। मुगल चित्रकला का विकास सम्राट अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ के शासनकाल में हुआ। मुगल चित्रकला का रूप फारसी और भारतीय शैली का मिश्रण के साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं का संयोजन भी है।

कला की मुगल शैली का सबसे पहला उदाहरण ‘ तूतीनामा पेंटिंग ’ है। टेल्स ऑफ-ए-पैरट जो वर्तमान में कला के क्लीवलैंड संग्रहालय में है। एक और मुगल पेंटिंग है, जिसे ‘ प्रिंसेज़ ऑफ द हाउस ऑफ तैमूर ’ कहा जाता है। यह शुरुआत की मुगल चित्रकलाओं में से एक है जिसे कई बार फिर से बनाया गया।

मुगल चित्रकला के विषय

  • मुगल चित्रकला में एक महान विविधता है, जिसमें चित्र, दृश्य और अदालत जीवन की घटनाएँ शामिल हैं, साथ ही अंतरंग स्थानों में प्रेमियों को चित्रित करने वाले चित्र आदि होते हैं।
  • मुगल चित्रकलाएँ अक्सर लड़ाई, पौराणिक कहानियों, शिफा के दृश्य वन्यजीव, शाही जीवन जैसे विषयों के आसपास घूमती हैं
  • पौराणिक कथाओं आदि मुगल बादशाहों की लंबी कहानियों को बयान करने के लिए भी ये चित्रकला एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बन गई हैं।

जहांगीर कालीन चित्रकला की विशेषताएं

  • मोरक्का (एलबम) के रूप में चित्र बनने लगे
  • अलंकृत हाशिए वाले चित्र बनने लगे
  • चौड़े हाशिए को फुल-पत्ति, पेड़, पौधों व मनुष्य की आकृतियों से अलंकृत किया जाता था।
  • छवि चित्र पर अधिक बल दिया गया।
  • जहांगीर दरबार के प्रमुख चित्रकार
  • जहाँगीर के समय के प्रमुख चित्रकारों में ‘फारुख बेग ’, ‘ दौलत ’, ‘ मनोहर ’, ‘ बिशनदास ’, ‘ मंसूर’ एवं अबुल हसन थे। ‘फारुख बेग’ ने बीजापुर के शासक सुल्तान ‘आदिल शाह’ का चित्र बनाया था।
  • जहांगीर ने बिशनदास को अपने दूत खान आलम के साथ फारस के शाह के दरबार में चित्र बनाने के लिए भेजा था।
  • जहांगीर के समय के सर्वोत्कृष्ट चित्रकार उस्ताद मंसूर एवं अबुल हसन थे।
  • ‘उस्ताद मंसूर’ एवं अबुल हसन जहाँगीर के श्रेष्ठ कलाकारों में से थे। उन्हें बादशाह ने क्रमशः ‘ नादिर-उल-अस्र ’ एवं ‘ नादिरुज्जमा ’’ की उपाधि प्रदान की थी।
  • उस्ताद मंसूर: पक्षियों की चित्रकारी, फुल चित्रकारी विशेषज्ञ था।
  • साइबेरिया का बिरला सारस व बंगाल का अनोखा पुष्प उस्ताद मंसूर द्वारा बनाए गए प्रसिद्ध चित्र थे
  • अबुल हसन: ये व्यक्ति के चित्रों के विशेषत थे।
  • इनकी प्रमुख विशेषता रंग योजना थी।
  • अबुल हसन ने ‘तुजुके जहाँगीर’ में मुख्य पृष्ठ के लिए चित्र बनाया था।

मुगलकालीन स्थापत्य

  • मुगलकालीन स्थापत्य इस्लामी एंव भारतीय कला का मिश्रित रूप है।
  • पेत्रादुला (संगमरमर पर जवाहरात से की गयी सजावट) मुगलकालीन स्थापत्य कला की अनूठी विशेषता है।

बाबर कालीन स्थापत्य

  • बाबर ने आगरा के निकट आरामबाग/रामबाग बगीचे बनवाए।
  • बाबर ने पानीपत में काबुली बाग में एक मस्जिद बनवायी।

हुमायुं कालीन स्थापत्य

हुमायुं ने दिल्ली में दीन पनाह नामक किले की स्थापना की। ये पुराना किला नाम से जाना जाता है।

शेरशाह कालीन स्थापत्य

  • शेरशाह ने दीनपनाह के अन्दर किला ए कुहना मस्जिद का निर्माण किया
  • शेरशाह ने सासाराम (बिहार) में शेरशाह के मकबरे का निर्माण करवाया।
  • यह मकबरा अष्टकोणीय लोदी शैली पर आधारित था।

अकबर कालीन स्थापत्य की विशेषताएं

  1. मुख्य रूप से बलुआ पत्थर का उपयोग हुआ था।
  2. शहतीरों का अधिक उपयोग हुआ था।
  3. मेहराबों के संरचनात्मक स्वरूप के स्थान पर अलंकरणों के लिए अधिक उपयोग हुआ था।
  4. गुम्बद लोदी शैली से प्रभावित थे।
  5. कुछ भवनों में संगमरमर का प्रयोग हुआ था।
  6. अकबर कालीन स्थापत्य को 2 चरणों में बांटा जा सकता है।
  7. प्रथम चरण: आगरा, इलाहबाद एवं लाहौर के किले
  8. द्वितीय चरण: फतेहपुर सीकरी का निर्माण

हुमायुं का मकबरा

  • इसका निर्माण हुमायुं की विधवा बेगम बेगा बेगम (हाजी बेगम) ने शुरू करवाया। इसका वास्तुकार मीरक मिर्जा गयास था।
  • यह दोहरी गुंबद वाला भारत का पहला मकबरा है।
  • चार बाग पद्धति का प्रयोग इसी मकबरे में किया गया था।
  • यह अष्टभुजीय आकार का मकबरा है। इसे ‘ताजमहल का पूर्वगामी’ माना जाता है।

आगरा का किला

इसका निर्माण अकबर काल में हुआ परन्तु जहांगीर महल को छोड़कर अन्य सभी संरचनाओं को शाहजहां ने तुडवा दिया था। आगरा के किले का वास्तुकार कासिम खां था।

फतेहपुर सीकरी

  • अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। यह आगरा से 26 किमी. पश्चिम में स्थित है।
  • फग्र्यूसन कहता है – ‘फतेहपुर सीकरी किसी महान व्यक्ति के मस्तिष्क का प्रतिबिम्ब है।’
  • फतेहपुर सीकरी का मुख्य वास्तुकार बहाउद्दीन था।

फतेहपुर सीकरी में स्थित इमारतें

  1. दीवान-ए-आम एवं दीवान-ए-खास
  2. जोधाबाई का महल: फतेहपुर के भवनों में सबसे बड़ी इमारत
  3. बीरबल का महल
  4. अबुल फजल का महल
  5. इबादत खाना
  6. शेख सलीम चिश्ती का मकबरा: जहांगीर ने इसमें संगमरमर लगवाया था।
  7. बुलन्द दरवाजा: गुजरात विजय की स्मृति में
  8. मरियम की कोठी: जोधाबाई महल के सामने स्थित
  9. इस्लाम शाह का मकबरा: वर्गाकार मेहराब का प्रयोग
  10. जामा मस्जिद: ‘फतेहपुर का गौरव’, पत्थर में रूमानी कथा’ उपनाम
  11. पांच महल/हवा महल: पिरामिड आकार में पांच मंजिला भवन
  12. तुर्की-सुल्ताना का महल: पर्सी ब्राउन ने इसे ‘स्थापत्य कला का मोती’ कहा

जहांगीर कालीन स्थापत्य

  • जहांगीर के समय स्थापत्य पर अधिक बल नहीं दिया गया।
  • अकबर का मकबरा
  • यह आगरा के निकट सिकन्दरा में स्थित है। इसके निर्माण की योजना अकबर ने बनायी थी परन्तु निर्माण जहांगीर ने करवाया। यह गुंबद विहीन मकबरा है।
  • ऐत्मादुद्लौला का मकबरा
  • यह आगरा में स्थित है। इसका निर्माण नूरजहां ने करवाया था। यह संगमरमर का प्रथम स्थापत्य भवन है।

शाहजहां कालीन स्थापत्य

  • शाहजहां का काल मुगल ‘वास्तुकला का स्वर्णयुग’ माना जाता है।
  • शाहजहां काल में संगमरमर का सर्वाधिक प्रयोग किया गया।
  • दीवान-ए-आम: आगरे के किले में शाहजहां द्वारा बनवाया गया था। इसमें बादशाह का ‘तख्त-ए-ताउस (मयूर सिंहासन)’ स्थापित था।
  • दीवान-ए-खास: आगरा में बनवाया
  • मोती मस्जिद (आगरा): शाहजहां ने बनवायी
  • मुसम्मन बुर्ज (आगरा): शाहजहां ने बनवाया
  • जामा मस्जिद (आगरा): जहांआरा ने बनवाया
  • लाल किला (दिल्ली): इसका निर्माण शाहजहां ने नए बसाए गए नगर शाहजहांनाबाद में किया था। यह दिल्ली में स्थित, लाल बलुआ पत्थर से बना है।
  • जामा मस्जिद (दिल्ली): इसका निर्माण शाहजहां ने करवाया था।
  • दीवान ए आम (दिल्ली):यह लाल किले में बनवाया गया जहां मयूर सिंहासन रखा जाता था। (राजधानी परिवर्तन के बाद)
  • दीवान ए खास (दिल्ली): लाल किले में निर्मित
  • ताजमहल: यमुना के तट पर आगरा में शाहजहां ने बनवाया। इसके नक्सानवीस (मिस्त्री) उस्ताद इंसा खां थे एवं मकबरे की योजना (स्थापत्यकार) उस्ताद अहमद लाहौरी ने बनायी थी। ताजमहल में मुमताज एवं शाहजहां की कब्रें हैं।

मुगलकालीन साहित्य

पुमुख पुस्तकें एवं लेखक

  • तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) : यह स्वंय बाबर ने तुर्की भाषा में लिखी थी। इस पुस्तक का 4 बार फारसी में अनुवाद (शाहजहां काल तक) हुआ था।
  • बाबर के समय फारसी अनुवाद – शेख तैजुद्दीन ख्वाजा ने किया।
  • अकबर के समय इसका फारसी अनुवाद अब्दुर्रहीम खाने खाना ने किया
  • हुमायुनामा: इसकी रचना गुलबदन बेगम ने की
  • अकबर नामा: इसकी रचना अबुल फजल ने की।
  • मुन्तख्वाब-उल-तवारिख: अब्दुल कादिर बदायुंनी
  • आलमगीर नामा: मोहम्मद काजिम सिराजी
  • मासीर-ए-आलमगीरी: साकी मुस्तैद खां, इसे मुगल राज्य का गजेटियर जादुनाथ सरकार ने कहा था।

प्रमुख पुस्तकों के अनुवाद

अकबर ने फैजी के अधीन एक अनुवाद विभाग की स्थापना की।

  • पंचतंत्र: इसका फारसी में अनुवाद अबुल फजल ने किया।
  • तुजुक-ए-बाबरी (बाबर नामा): फारसी अनुवाद अब्दुर्रहीम खाने खाना
  • रामायण: बदायुनी
  • लीलावती: फैजी

मुगलकाल में भारत आए विदेशी यात्री

  • अकबर काल में आने वाले: फादर एक्वाविवा, फादर ऐंथाना मोंसेरात, राॅल्फफिच, जेरोम जेवियर एवं इमैन्युल पिनहोरो।
  • जहांगीर काल में आने वाले: विलियम हाॅकिंस (ब्रिटिश जेम्स का राजदूत), सर टाॅमस राॅ, पियेत्रो देला वोल, विलियम फिंच, एडवर्ड टैरी, पेलसार्ट।
  • शाहजहां काल में आने वाले: पीटर मुण्डी (इटालवी), जीन बैपटिस्ट ट्रैवर्नियर, फ्रांसिस वर्नियर, मैनडेस्लो, निकोलाओ मनूची।