मुहम्मद शाह (1719-48 ई.)

  1. जन्म – 7 अगस्त 1702
  2. शासनकाल –  1719 से 1748 
  3. मृत्यु – 6 अप्रैल 1748
  • शाहजहाँ II या जहाँशाह का पुत्र रौशन अख्तर मुहम्मदशाह के नाम से 28 सितम्बर, 1719 ई. को गद्दी पर बैठा।
  • प्रशासन के प्रति लापरवाह तथा युवतियों का शौकीन होने के कारण इसे ‘रंगीला’ कहा गया।
  • तूरानी दल, जो सैयद बंधुओं के खिलाफ उठ खड़ा हुआ था, के नेता चिकिलिच खाँ को सैयद बंधुओं का पतन करने की खुशी में मुहम्मदशाह ने अपना प्रधानमंत्री (21 फरवरी 1722 ई. को) नियुक्त किया।
  • अनुशासन प्रिय होने के कारण वह दरबार में कठोर नियम लागू करना चाहता था, किन्तु बादशाह के विलासी प्रवृत्ति के कारण कोई सहयोग प्राप्त न कर सका।
  • अंततः निराश होकर वह 18 दिसम्बर, 1799 ई. को दिल्ली त्याग दिया तथा हैदराबाद के सूबेदार मुबारिज खाँ को अपदस्त कर हैदराबाद एवं दक्कन के 6 सूबों को अपने अधिकार में कर अक्टूबर, 1724 ई. में अपने को स्वतंत्र घोषित कर हैदराबाद को अपनी राजधानी बनायी तथा सम्राट मुहम्मदशाह से ‘आसफजाह’ की उपाधि ग्रहण की।
  • निजामुलमुल्क का दिल्ली से प्रस्थान “साम्राज्य से निष्ठा एवं सद्गुण के पलायन का प्रतीक था
  • मुहम्मदशाह के काल में हैदराबाद के निजामशाही वंश के साथ ही बंगाल में मुर्शीद कुली खाँ, अवध में सआदत खाँ, भरतपुर और मथुरा में बदन सिंह, गंगा-यमुना दोआब में कटेहर रूहेलों के नेतृत्व में और फर्रुखाबाद में बंगश पठानों ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली।
  • 1 मार्च, 1737 ई. में मराठों ने लगभग 500 घुड़सवारों के साथ दिल्ली पर अधिकार करने का प्रयास किया तथा अंत में 17 जनवरी, 1738 ई. में मुगल सम्राट तथा मराठों के मध्य सिरौंज के समीप संधि हुई, जिसके परिणामस्वरूप मुगल सम्राट ने मराठों का अधिकार नर्मदा से चंबल तक स्वीकार किया तथा साथ ही 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी देनी पड़ी।
  • मुहम्मदशाह के शासन काल की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1739 ई. में नादिरशाह का भारत पर आक्रमण था।
  • दिल्ली के भयानक कत्लेआम में लगभग 30,000 लोगों की जाने गईं।
  • वह दिल्ली को लूटते हुए शाही खजाने, मोती, हीरे, जवाहरात एवं संसार भर में प्रसिद्ध मयूर सिंहासन (तख्ते ताऊस) को भी लूट लिया।
  • 16 मार्च, 1739 ई. को नादिरशाह भारत से वापस चला गया।
  • अपने साथ वह विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा (जो तख्ते ताउस में लगा था) भी ले गया।
  • 1739 ई. में ही नादिशाह की मृत्यु के बाद उसका सेनापति ‘अहमदशाह अब्दाली‘ अफगानिस्तान का शासक बना।
  • उसने मुहम्मद शाह के शासनकाल के दौरान पंजाब के सूबेदार शाहनवाज खाँ के निमंत्रण पर भारत पर आक्रमण किया।
  • अब्दाली लाहौर जीतने के बाद दिल्ली पर आक्रमण के लिए आगे बढ़ा, किन्तु मुहम्मदशाह के पुत्र शाहजादा अहमद ने मार्च, 1748 ई. में मच्छीवाड़ा के समीप ‘मानूपुर’ में उसे पराजित किया।
  • 28 अप्रैल, 1748 ई. को मुहम्मदशाह की मृत्यु के बाद अहमदशाह दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • नादिरशाह के आक्रमण के समय उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया था।
  • वह बिना किसी प्रतिरोध के भारतीय इलाकों में घुस आया।
  • दिल्ली की सुरक्षा के लिए जल्दी-जल्दी तैयारियाँ की गई, किन्तु आपसी गुटाबाजी के कारण सामंतों ने सूत्रबद्ध होने से इंकार कर दिया था।
  • वे सुरक्षा की योजना तथा सेनापति के नाम पर सहमत नहीं हो सके।
  • परिणामस्वरूप 13 फरवरी, 1739 ई. को करनाल में हुए युद्ध में मुगल फौज ने जबरदस्त शिकस्त खाई।
  • अब्दाली ने भी 1748 तथा 1767 ई. के बीच उत्तरी भारत, खासकर दिल्ली और मथुरा पर बार-बार आक्रमण किया।