अलाउद्दीन आलम शाह (1445–1451ई.)

  1. शासनकाल – 1445–1451ई.
  2. मृत्यु – 1476 ई. 
  • मुहम्मदशाह के पश्चात उसका पुत्र अलाउद्दीन आलमशाह की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा ।
    ये सैय्यद वंश का आखरी शासक था।
  • अलाउद्दीन आलम शाह एक अयोग्य शासक था जिसके समय में दिल्ली सल्तनत का क्षेत्र अति सीमित हो गया था।
  • अलाउद्दीन आलम शाह अपने वजीर हमीद खान की बढ़ती शक्ति के कारण बदायूं चला गया। उसने यह नगर इतना भा गया कि दिल्ली की बजाय उसने वही रहने का निर्णय किया।
  • 1447 ई. में बहलोल लोदी ने दिल्ली पर आक्रमण किया किंतु वह असफल रहा । अंत में वजीर हमीद खां ने बहलाेल लोदी को आमंत्रित किया। लेकिन कुछ समय बाद बहलोल लोदी ने हमीद खान का वध करवा दिया।
  • 1405 ई में उसने संपूर्ण शासन अपने नियंत्रण में ले लिया
  • इसके समय में यह कहावत ( देखो शाह – ए – आलम का राज्य दिल्ली से पालम तक ) लोकप्रिय हो गयी।
  • इसी के समय में दिल्ली सल्तनत के शासन की बागडोर सैय्यदों से निकलकर लोदियों के पास चली गयी।
  • अलाउद्दीन आलम शाह 1476 ई. में अपनी मृत्यु तक बदायूं पर राज करता रहा।

तथ्य

  • आलम शाह अपने देश का सबसे अयोग्य शासक साबित हुआ। आलम शाह के काल में दिल्ली सल्तनत, दिल्ली शहर और कुछ आस-पास के गाँवों तक सीमित हो गई।
  • बहलोल लोदी (लाहौर का गवर्नर) के डर के कारण आलम शाह अपनी राजधानी दिल्ली कसे हटा कर बदायूँ ले गया और यहाँ वह भोग-विलास में खो गया।
  • उसके मन्त्री हमीद खाँ ने बहलोल लोदी को आमन्त्रित किया, जिसने कि दिल्ली पर अधिकार कर लिया। कुछ समय तक बहलोल खाँ लोदी ने आलम शाह के प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया।
  • 1451 ई. में आलमशाह ने बहलोल लोदी को दिल्ली का राज्य पूर्णतः सौंप दिया और स्वयं बदायूं की जागीर में रहने लगा। वहीं पर 1476 ई में उसकी मृत्यु हुई।
  • इस प्रकार 37 वर्ष के अकुशल शासन के बाद सैय्यद वंश का अन्त हुआ और लोदी वंश की नींव पड़ी।