खुरासान अभियान

  • उद्देश्य – मंगोल आक्रमण की समस्या का समाधान करना।
  • सैनिक – 370000 सैनिक

सुलतान ने मध्य एशिया में स्थित खुरासान राज्य की अव्यवस्था का लाभ उठाकर वहां कब्जा करना चाहा। इसके लिए 3 लाख 70 लोगो की विशाल सेना तैयार की गयी तथा 1 वर्ष का वेतन पहले ही दे दिया परन्तु खुरासान में स्थिति सामान्य हो गयी एवं यह योजना भी विफल हो गयी।

खुरासान की सही भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में मतभेद है बरनी ने इरान और फरिश्ता ने इरान तुरान के रूप में की है कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थान मध्य एशिया का ट्रांस आक्सियाना क्षेत्र था।

 यह अभियान तरमाशरीन और सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के मैत्री का परिणाम था मध्य एशिया की राजनीति में एक शून्यता आ गई थी जिसका लाभ मोहम्मद बिन तुगलक उठाना चाहता था इस योजना की पूर्ति के लिए सुल्तान ने एक विशाल सेना संगठित की ,जिसमें लगभग 370000 सैनिक थे

इस सेना में दोआब के राजपूत और कुछ मंगोलों को सम्मिलित किया गया सेना को 1 वर्ष की अग्रिम वेतन दिए गए लेकिन सेना के कुच करने से पहले ही मध्य एशिया की राजनीति में परिवर्तन हो गया तरमाशरीन अब ध्वस्त कर दिया गया और मिश्र और इरान में संधि हो गई,

फलस्वरुप मुहम्मद बिन तुगलक को अपनी योजना त्यागनी पड़ी अधिकांश सेना भंग कर दी गई सेना के कुछ भाग को उत्तरी भारत की पर्वतीय श्रृंखला में सीमाओं को दृढ़ करने के लिए भेजा गया इस विशाल सेना पर काफी धन व्यय किया गया,

इससे सेना की आर्थिक स्थिति दुर्बल हो गई सेना से निकाले गए सैनिकों ने भी असंतोष का वातावरण उत्पन्न किया अतः सुल्तान की योजना भी असफल रही इससे उसके प्रसिद्धि में कमी हुई