खिलजी साम्राज्यवाद

उत्तर भारत पर किए गए अभियान

1. गुजरात अभियान (1298-1304 ई.)

अलाउद्दीन का प्रथम सैन्य अभियान 1298 ई. में गुजरात के विरूद्ध था। इस अभियान का नेतृत्व उलुग खां और नुसरत खां ने किया। इसमें गुजरात का बघेल राजपूत पराजित हुआ। गुजरात मार्ग में जैसलमेर विजित किया। गुजरात अभियान से ही मलिक काफूर को लाया गया। मलिक काफूर को 1000 दीनार में खरीदा गया था इसी कारण उसे हजार दीनारी भी कहा जाता था।

2. रणथम्भौर अभियान (1301 ईo)

1301 ई. में उलुग खां एवं नुसरत खां के नेतृत्व में रणथम्भौर पर आक्रमण किया। पहले रणथम्भौर के राणा हम्मीर देव ने आक्रमण विफल किया तथा नुसरत खां मारा गया। इसके बाद स्वंय अलाउद्दीन खिलजी ने कमान संभाली । राणा हम्मीर देव के प्रधानमंत्री रणमल ने धोखा किया। हम्मीर देव पराजित हुए एवं वीरगति को प्राप्त हुए।

हम्मीर काव्य के अनुसार, रतिपाल एवं कृष्णपाल इस पराजय के प्रमुख कारण थे।

हम्मीर देव की मृत्यु के बाद हम्मीर देव की पत्नि रंगदेवीऔर रणथम्भौर की राजपूत महिलाओं ने जल जौहर किया राजस्थान में जौहर का यह प्रथम साक्ष्य था

जौहर

जौहर के दौरान एक अग्निकुण्ड बनाया जाता था। यदि युद्ध में राजा मारा जाता तो रानी एवं अन्य स्त्रियां अपने स्वाभिमान एवं इज्जत की रक्षा के लिए उस अग्नि कुण्ड में कूदकर जान दे देती थी। एवं अपने गौरव, सतीत्व की रक्षा करती थी। पुरूषों द्वारा युद्ध में जाते समय केसरिया वस्त्र धारण किए जाते थे यह केसरिया करना कहा जाता था।

3 .चित्तौड़गढ़ पर अभियान (1303 ई.)

चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण 1303 ई. में किया गया। इस आक्रमण का नेतृत्व अलाउद्दीन खिलजी ने किया। इससे पूर्व यह किसी सुल्तान ने नहीं जीता था। मलिक मुहम्मद जायसी की रचना पद्मावत् के अनुसार चित्तौड़ के राजा रतनसिंह की रानी पद्मिनी (पद्मावती) को प्राप्त करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया। लेकिन चित्तौड़गढ़ का किला सामरिक महत्व का था जो अलाउद्दीन के दक्षिण भारत के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता।

इस युद्ध में रतनसिंह वीरगति को प्राप्त हुए एवं रानी पद्मिनी ने जौहर किया। इस युद्ध में चित्तौड़गढ़ के दो वीर सैनिक गोरा एवं बादल वीरगति को प्राप्त हुए। चित्तौड़गढ़ पर अधिकार कर, चित्तौड़गढ़ को अपने पुत्र खिज्र खां को सौंप दिया गया एवं इसका नाम खिज्राबाद कर दिया गया।

इस अभियान में अमीर खुसरो अलाउद्दीन खिलजी के साथ था परन्तु अमीर खुसरो ने पद्मावती की घटना का कोई उल्लेख नहीं किया।

4. मालवा पर अभियान (1305 ई. )

इस अभियान का नेतृत्व आइनुलमुल्क मुल्तानी ने किया। मालवा का शासक महलक देव भाग गया एवं मालवा भी सल्तनत का हिस्सा बन गया।

5. सिवाना पर अभियान (1308 ईo )

सिवाना के शासक सातलदेव एवं अलाउद्दीन खिलजी के मध्य युद्ध हुआ। इस युद्ध का नेतृत्व कमालुद्दीन कुर्ग ने किया एवं युद्ध में सातलदेव वीरगति को प्राप्त हुए एवं राजपूत स्त्रियों ने जौहर किया। अलाउद्दीन ने इस दुर्ग का नाम खैराबाद रख दिया तथा कमालुद्दीन कुर्ग को किले का संरक्षक नियुक्त किया।

6. जालौर पर अभियान

जालौर के शासक कान्हदेव सोनगरा एवं अलाउद्दीन खिलजी के मध्य युद्ध हुआ जिसका नेतृत्व भी कमालुद्दीन कुर्ग ने किया। कान्हदेव वीरगति को प्राप्त हुआ।

दक्षिण भारत पर किए गए अभियान

1.देवगिरी अभियान (1306- 07 ई.)

अलाउद्दीन के आक्रमण के समय देवगिरी (राजधानी: देवगिरी) में सेना नहीं थी रामचन्द्र का पुत्र सिंघण देव अपनी सेना दक्षिण अभियान के लिए ले गया था। रामचन्द्र देवगिरी के किले में अन्दर चला गया। अलाउद्दीन ने जनता को जी भरकर लूटा। रामचन्द्र ने संधि प्रस्ताव भेजा परन्तु सिंघण देव ने युद्ध करने का निश्चय किया परन्तु सिंघण की सैना मैदान छोड़कर भाग गयी। यह देख सिंघण देव ने पुनः संधि की मांग पेश की। अलाउद्दीन ने कठोर शर्तों के साथ संधि स्वीकार की। रामचन्द्र एवं सिंघण देव ने प्रतिवर्ष कर देने का वचन दिया। देवगिरी अभियान से अलाउद्दीन ने अपार धन प्राप्त किया।

देवगिरी का द्वितीय अभियान (1312-13 ई.)

देवगिरी के शासकों ने 2-3 वर्ष तक अलाउद्दीन को कर देना बन्द कर दिया था। इस कारण देवगिरि पर पुनः आक्रमण किया। इस आक्रमण के बाद खिलजी ने रामचन्द्र को ‘ रायरायने की उपाधि ’ प्रदान की एवं गुजरात में ‘ नवसारी ’ की जागीर और एक लाख सोने के टंके भेंट किए। इसका उद्देश्य अलाउद्दीन दक्षिण भारत पर विजय के लिए एक भरोसेमंद साथी चाहता था।

2.तेलंगाना अभियान (1309 ई.)

इस अभियान का नेतृत्व मलिक काफूर ने किया एवं देवगिरी के शासक रामचन्द्र ने मलिक काफूर का पूरा सहयोग किया। वारंगल के शासक ने बिना युद्ध किए अधीनता स्वीकार कर ली एवं प्रतीक के रूप में सोने की एक मुर्ति जिसके गले में सोने की जंजीर थी भेजी। वारंगल के शासक प्रताप रूद्र देव ने हाथी, घोड़े, रत्न, सौना, चांदी आदि दिए कोहिनूर हीरा यहीं से मलिक काफूर ने प्राप्त किया।

कोहिनूर

कोहिनूर हीरा भारत के आंध्रप्रदेश राज्य के गुंटूर जिले में स्थित गोलकुंडा की खदानों से प्राप्त हुआ था। इसे कोह-ए-नूर नाम नादिरशाह ने दिया। इस वक्त कोहिनूर हीरा ब्रिटेन के राजपरिवार के पास है। लंदन टॉवर, ब्रिटेन की राजधानी लंदन के केंद्र में टेम्स नदी के किनारे बना एक भव्य किला है जिसे सन् 1078 में विलियम द कॉकरर ने बनवाया था। राजपरिवार इस किले में नहीं रहता है और शाही जवाहरात इसमें सुरक्षित हैं जिनमें कोहिनूर हीरा भी शामिल है।

3. होयसल अभियान (1310 ईo)

होयसल राज्य (राजधानी: द्वारसमुद्र) पर बल्लाल-3 का शासन था। इस अभियान का नेतृत्व मलिक काफूर ने किया। देवगिरी शासक रामचंद्र ने काफूर की सहायता की। बल्लाल ने प्रतिवर्ष कर अदा करने की संधि की तथा बहुत अधिक मात्रा में सोना, चांदी, हीरे, मोती आदि दिए। बल्लाल को अपने अगले अभियान में सहायता करने के लिए विवश किया।

4.पाण्ड्य अभियान

द्वारसमुद्र के बाद मलिक काफूर पाण्ड्य राज्य (राजधानी: पाण्ड्य) की ओर बढ़ा। इस अभियान में बल्लाल-3 ने मलिक की मदद की। पाण्ड्य शासक के दो पुत्र सुन्दर पाण्ड्य और वीर पाण्ड्य (अवैध पुत्र) के बीच सिंहासन को लेकर गृहयुद्ध चल रहा था। मलिक काफूर ने सुन्दर पाण्ड्य का पक्ष लिया परन्तु मलिक काफूर न तो वीर पाण्ड्य को हरा सका और न ही कोई शर्त लाद सका। गृहयुद्ध में वीर पाण्ड्य जीता एवं सुन्दर पाण्ड्य को बाहर निकाल दिया। इस अभियान में मलिक काफूर ने नगरों, भवनों एवं मन्दिरों को लूटा परन्तु वीर पाण्ड्य ने न जीत सका।बल्लाल-3 को दिल्ली बुलाया गया एवं उसकी सहायता से प्रसन्न होकर अलाउद्दीन ने उपहार स्वरूप खिलत, एक मुकुट और छत्र तथा 10 लाख टंका मुद्राएं प्रदान की। यह विजय राजनीतिक दृष्ट से महत्वहीन परन्तु आर्थिक दृष्टि से महान विजय थी।

5 . देवगिरी पर तृतीय आक्रमण

रामचंद्र देव के पुत्र सिंघण देव ने सिंहासन पर बैठते ही सल्तनत की अधीनता के सब लक्षणों को समाप्त कर दिया एवं स्वतंत्र शासक की भांति कार्य करने लगा। मलिक काफूर को आक्रमण के लिए भेजा गया तथा सिंघण देव की पराजय हुई तथा सिंघण देव युद्ध में मारा गया। रामचंद्र के दामाद हरपाल देव को गद्दी पर बिठाया गया।

सुल्तान अलाउद्दीन ने अपने अल्पवयस्क पुत्र शिहाबुद्दीन उमर को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। 5 जनवरी 1316 को अलाउद्दीन की मृत्यु हो गई।

दक्षिण भारत पर अभियान का क्रम

क्रमराजधानीसमकालीन शासक
देवगिरीदेवगिरीरामचन्द्र
तेलंगानाबारंगलप्रतापरूद्र
होयसलद्वारसमुद्रबल्लान तृतीय
मदुरामदुराकुलशेखर