सिन्ध में नव-सूफीवाद

सिन्ध भी नव-सूफीवाद का महान केन्द्र था । यहाँ बहुत से सूफी सत पैदा हुये । रहस्यवाद की शुरुआत शाह करीम ने लगभग 1600 ई. में की जिन्हें धार्मिक प्रेरणा अहमदाबाद के पास एक वैष्णव सन्त से मिली जिसने ॐ के रहस्यों से उनका परिचय कराया ।

दूसरे उल्लेखनीय रहस्यवादी शाह इनायत थे जिनका कहना था कि ईश्वर किसी विशिष्ट सम्प्रदाय की सम्पत्ति नहीं है । सिन्ध के सूफी संतों में शाह लतीफ का स्थान सबसे ऊंचा है । वे महान कवि और गायक और उनके गीत अभी भी गाये जाते है ।

इसके अलावा आज भी सूफी रहस्यवादी कवियों बेदिल और बेकस के लिखे गीत सिंधी समाज में लोकप्रिय हैं ।

सूफी सन्त बुल्ले शाह सिन्ध के सबसे प्रिय कवि है । वे कुरान और अन्य सभी धर्मग्रन्थों के भयंकर आलोचक थे । उनका कथन है ‘आपको ईश्वर न तो मस्जिद में न ही काबा में, न कुरान और अन्य पवित्र अन्यों में न ही औपचारिक प्रार्थना में मिलेगा ।

बुल्ला तुम्हें मुक्ति न तो मक्का में, न ही गंगा में मिलेगी, तुम्हें मुक्ति केवल उसी समय मिलेगी जब तुम अपना अहंकार छोड़ दोगे ।’