कराचिल अभियान (1337 ई.)

  • अभियान – 1337 ई.
  • कराचिल का क्षेत्र हिमाचल की तराई में स्थित आधुनिक कुमायूं जिले में था।
  • कराचिल अभियान का लक्ष्य सीमित था,सुल्तान सीमावर्ती क्षेत्रों पर अपना प्रभाव सुदृढ़ करना चाहता था।
  •  कराचिल का यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था क्योंकि यह सल्तनत और चीनी साम्राज्य के बीच का क्षेत्र था।

 अकाल संहिता 

  •  मुहम्मद बिन तुगलक पहला शासक था जिसने अकाल पीड़ितों की सहायता की और उनसे निपटने के लिए दिल्ली में राहत शिविर खोले गए
  •  अवध-जहां अकाल का प्रभाव नहीं था (खाद्यान्न वहां से मंगाए)
  •  अकाल से राहत के लिए उसने अकाल संहिता तैयार करवाई
  •  कुआं खोदने और बीज और फल ख़रीदने के लिए कृषकों को को कृषि ऋण (सोंधर) भी प्रदान किया

 महामारी 

  •  दोआब क्षेत्र में अकाल के दौरान ही दिल्ली सहित देश के अनेक भागों में प्लेग महामारी फैल गई
  •  इसीलिए मोहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली छोड़कर शाही शिविर से 80 किलोमीटर दूर गंगा के किनारे स्थित एक स्थान स्वर्गद्वारी (कन्नौज के निकट) में स्थापित किया और यहां 2 साल तक रहा।

 कृषि के विस्तार की योजना 

  •  स्वर्गद्वारी से लौटने के पश्चात मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विस्तार और सुधार के लिए एक वृहत योजना बनाई
  •  उसने कृषि से संबंधित एक नया विभाग दीवान ए अमीर कोही की स्थापना की,इसका प्रधान अमीर ए कोही था।
  •  इसके अंतर्गत 75 किलोमीटर × 75 किलोमीटर की विकास योजना तैयार की गई, इसके अंतर्गत किसानों को अच्छी फसल उगाने पर जोर डाला गया

 बरनी ने लिखा है की- इस प्रकार जौ के बदले गेहूं लगाया जाता एवं गेहूं के बदले गन्ना तथा गन्ना के बदले अंगूर और खजूर लगाया जाता

 इस योजना के तहत 3 वर्ष में सोंधर के प्रयोजन से 70लाख से अधिक टंके मंजूर किए गए लेकिन यह योजना भी सफल नहीं हो सकी

 मोहम्मद बिन तुगलक ने फसलों में चक्रवर्तिन पद्धति को अपनाया था

 मंगोल आक्रमण मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में मंगोलों का एक मात्र आक्रमण हुआ

 1326-27 ईसवी में ट्रांस आक्सियाना का चुगताई मंगोल शासक अलाउद्दीन तरमाशीरी ने भारत पर आक्रमण किया।

 इस आक्रमण के विषय में विद्वानों में अनेक मत है

  •  अधिकांश विद्वानों का मानना है कि अलाउद्दीन तरमाशिरी एक शरणार्थी के रूप में भारत आया था ,जिसकी सहायता कर मुहम्मद बिन तुगलक ने मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किए।
  •  इसके विपरीत कुछ विद्वानों का मानना है कि मंगोल आक्रमणकारी के रूप में आए और मुल्तान और लाहौर से लेकर बदायूं तथा मेरठ तक लूटपाट की।
  •  मुहम्मद बिन तुगलक ने उसे रिश्वत देकर वापस कर दिया।